कोपरगाँव के इतिहास में प्रथम बार निर्ग्रन्थ मुनि की समाधि
कोपरगाँव
चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज की निश्रा में संघस्थ परमानंद सागर महाराज का समता पूर्वक समाधिमरण हुआ। श्री राजेश पंचोलिया ने बताया की कोपरगाँव के इतिहास में पहली बार किसी दिगबर सन्त की समाधि हुई है समाजजन ने इस यात्रा में बढ़ चढ़कर भाग लिया आचार्य श्री की दूरदर्शिता ही कहेगे उन्हें ज्ञात था यह समाधि हो सकती है इसीलिए उन्होंने एक उचित शहर को सुना। हम सभी को ज्ञात है पूज्य संघ का विहार राजस्थान की और हो रहा है। पूज्य मुनि श्री की समाधी व अंतिम क्रिया आचार्य श्री के सानिघ्य में समाज के स्कूल परिसर में हुई।
एक परिचय परमानंद सागर महाराज
संघ सहित वर्ष 2022 में विहार चल रहा है
विगत वर्ष 13 अगस्त 2021 को कोल्हापुर के अलास नगर के 85 वर्षीय श्री अप्पा जी अलासे आचार्य श्री 108 वर्द्धमान सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा लेकर मुनि श्री 108 परमानंद सागर जी बने।
13 जनवरी 2022 को कोपरगाँव महाराष्ट्र में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री ने मुनि श्री की भावना अनुरूप संस्तरा रोहण की क्रिया कराई यम सल्लेखना अंतर्गत मुनि श्री ने चारों प्रकार के अन्न जल आदि आहार का त्याग कर दिया।

आचार्य श्री द्वारा अब तक 55 से अधिक साधु सन्तो की समाधि करवायी
श्री राजेश पचोलिया से मिली जानकारी अनुसार दया मूर्ति आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी जिनके सानिध्य मार्ग दर्शन में निर्यापकाचार्य होकर विगत 53 वर्षो के साधु जीवन और 33 वर्ष के आचार्य पद पर लगभग 55 से अधिक दीक्षा गुरु सहित मुनिराजों आर्यिका माताजी सहित साधुओ श्रावक श्राविकाओं की उत्कृष्ट समाधियां कराई हैयह उल्लेखनीय है कि अच्छी उत्कृष्ट समाधि होने पर भव्य जीव अगले 2 भव से 8 भव में सिद्धशिला पर विराजित होता है। किसी साधु की समाधि सल्लेखना देखना भी तीर्थ यात्राओं से कई गुणा पुण्य दायीं है।
तेरी छत्रछाया भगवन मेरे सर पर होय
मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे पर दर पर होय
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
