संसार में सबसे बड़ा ज्ञान दान है, स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने मनुष्य का अपना जीवन आदर्श बना ना चाहिए इस पर जोर दिया।
पूज्य माताजी ने इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को अपना जीवन आदर्श जीवन बनाने के लिए पूरा प्रयास करना चाहिए। जिससे बच्चे भी सीख ले सके। 
माताजी ने कहा कि हम बच्चों के सामने रात में भोजन करेंगे, मंदिर नहीं जाएंगे, स्वाध्याय नहीं करेंगे तो हम बच्चों को क्या शिक्षा दे पाएंगे। हमे अपने आचरण को अच्छा करना होगा। उसके बाद ही हम अपने बच्चों से आशा कर सकते हैं। यह जीवन कई पुण्य कर्म का फल है। इसीलिए मंदिर जाओ, स्वाध्याय करो, आहार देने जाओ, जब यह सब करोगे तो बच्चों में संस्कार अपने आप ही आ जाएंगे। हमें अपना लगाव भगवान में लगाना है, जिसमें अधिक लगाव होगा, प्रेम होगा उसकी तस्वीर हम घर पर लगाते हैं। उसी से व्यक्ति के चारित्र और विचारों का पता चल जाता है।




माता जी ने कहा कि संसार में सबसे बड़ा दान ज्ञान दान है। इस दान में सभी दान समाहित हैं। हमने बाह्य वस्तुओं की कीमत तो जान ली, लेकिन जिनवाणी शास्त्रों की कीमत नहीं जान पाए, जो सबसे अधिक मूल्यवान वस्तु है, उसे हम घर के कोने में रख देते हैं। कोई जिनवाणी शास्त्र भेंट करता है, तो हमारे घर में बहुत पड़ी है। हम वैसे ही मंदिर में दिए आते हैं घर में जगह ही नहीं है।
माताजी ने अनर्थदंड के बारे में बताया कि व्यर्थ पापों से बचना चाहते हो तो चाकू, तलवार, माचिस जैसी हिंसा की वस्तुओं को कभी भी दान में नहीं देना चाहिए। हमारी दी हुई वस्तु से किसी ने हिंसा के उपयोग में ले ली तो उसका पाप हमें लगेगा। हमें अनावश्यक वस्तुओं को देने से भी बचना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
