कंजूसों को मंदिर की बागडोर नहीं सोपना चाहिए विमल सागर महाराज पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने हर व्यक्ति के जीवन में मां की महत्वपूर्ण भूमिका बताई
रहली
पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज आदि मुनिराज अतिशय क्षेत्र रहली में विराजमान है, एवं धर्म की गंगा को बहा रहे हैं।
मंगलवार की अनुपम बेला में पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कभी भी कंजूसों को मंदिर की बागडोर नहीं सोपना चाहिए, पूजन एवं अभिषेक के पात्र अच्छे होना चाहिए, मंदिर की प्रबंध कार्यकारिणी प्रभु के सेवक बनकर कार्य करें, वैभव के साथ पूजन करें, अहो भाग्य समझकर सेवा करें, उन्होंने कहा कि तीनलोक के नाथ जो उच्चासन देता है, वह ऊंचाइयों पर पहुंचता है। भगवान के सामने चरण पादुका नहीं उतारना चाहिए, रंगोली डालना चाहिए, जिससे पॉजिटिव एनर्जी मिलती है।




धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने जीवन में मां की भूमिका पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि मां हर एक के जीवन में महत्वपूर्ण व सर्वश्रेष्ठ होती है, क्योंकि इस दुनिया में किसी भी चीज को मां की ममता ही समझ सकती है, मा ही बच्चे की पहली और सबसे अच्छी दोस्त होती है। जिससे हम बिना किसी झिझक के अपने मन की हर बात बता देते हैं, मां हमेशा परिवार का ख्याल रखती है। वह हमेशा परिवार की खुशियों के बारे में सोचती है।
महाराज श्री ने कहा कि मां वह सिर्फ माता-पिता ही नहीं बल्कि मेरे जीवन की मार्गदर्शक रोशनी भी है। उनके प्यार और देखभाल ने मुझे उसे व्यक्ति के रूप में आकर दिया है जो मैं आज हूं। उनकी निस्वार्थता सचमुच उल्लेखनीय है। वह हमेशा मेरी जरूरतो और खुशियों को हर चीज से ऊपर रखती है।
एक मां अपने बच्चों को बचपन से ही लगातार नई चीज सिखाती रहती हैं, चाहे वह चलना हो, बात करना हो या अपने फैसले खुद लेना हो। माताएं अपने बच्चों को मूल्यवान जीवन कौशल सिखाती रहती हैं। और किशोरावस्था की चुनौतियों से निपटने में उनकी सहायता करती है। माताएं वकील के रूप में भी काम करती हैं, जो एक महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए माता-पिता का हमें ध्यान रखना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
