माता-पिता की जिम्मेदारी है कि बचपन से ही बच्चों में अच्छे संस्कार डालें ताकि वह आगे चलकर पाप करने से बच सकें स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने बच्चों में अच्छे संस्कार डालने के विषय पर जोर दिया माताजी ने कहा कि हमारे अंदर गलत या अच्छे संस्कार एकदम नहीं आते हैं। हमें जो बार-बार दिखता है धीरे-धीरे हमारे भाव भी उस और आकर्षित होने लगते हैं।
पूज्य माताजी ने कहा कि अपने बच्चों को संस्कारित बनाना है तो उनको अच्छे समाज व धार्मिक वातावरण में रखना बहुत जरूरी है। माता-पिता की जिम्मेदारी है बचपन से ही बच्चों में अच्छे संस्कार डालें, ताकि वह आगे चलकर पाप करने से बच सकें। एक लोकोक्ति बताते हुए कहा कि पूत कपूत तो क्यों धन संचय, आपकी संतान सही मार्ग पर चलेगी तो आपको ज्यादा चिंता की आवश्यकता ही नहीं है। संतान गलत मार्ग पर चली गई तो फिर आपका धन, व्यवहार कोई काम आने वाला नहीं है।




माताजी ने आगे कहा कि समाज में सम्मान से रहना चाहते हो तो मर्यादित रहना होगा। अनैतिक संबंध रखने वाले पुरुष महिला का कोई सम्मान नहीं करता है। उसे समाज में हीन दृष्टि से देखा जाता है। यह अणुव्रत आज हमें कष्टदाई लग रहे होंगे, लेकिन यह हमारे जीवन को अच्छा बनाने वह पापों से बचने का रास्ता है। पाप करने के लिए अधिक मेहनत नहीं लगती है, लेकिन धर्म करने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है। जैसे हमारे घर के बाहर बहुत सी कटीलीघास, खरपतवार अपने आप उग जाती है। उसमें हमें कुछ नहीं करना पड़ता, लेकिन हमें बाग, फल फूल वाले पौधे लगाना है तो पुरुषार्थ करना पड़ता है। इसलिए हमें अपने अंदर की कोई बुराई को छोड़ना हो, किसी आदत को छोड़ना हो तो उसको छोड़ने का धीरे-धीरे प्रयास करना होगा।
माताजी ने एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि किसी को चाय की बहुत आदत है, वह धीरे-धीरे कम करने का प्रयास करें, एक दिन उसकी चाय एक दिन अवश्य छूट जाएगी, लेकिन प्रयास करना होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
