सुयशगुप्त सागर महाराज

धर्म

जैन दर्शन के युवाश्रमण मुनि श्री सुयशगुप्त जी गुरुदेव की 45 वी जन्म जयंती 14 फरवरी 2022-*

*आचार्य देव श्री आदिसागर जी अंकलिकर स्वामी* की महत्ती गौरवशाली *परम्परा* में *नन्दी शाखा* के *प्रज्ञायोगी आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव* के ज्येष्ठ व श्रेष्ठ शिष्य प्रवचन प्रभावक धीर-गम्भीर *युवायति मुनि श्री सुयशगुप्त जी गुरुदेव का संक्षिप परिचय👇*

मध्यप्रदेश के देवास जिले में *हाटपीपल्या* नाम का नगर है जहाँ पहाड़िया जैन गौत्र का बड़ा सयुक्त परिवार रहता है
इसी सुखी समृद्ध सयुक्त परिवार में *पवन जी पहाड़िया व वीणा जी पहाड़िया नामक महापुण्य शाली दपत्ति है*
जिनकी तीन सन्तानो में पहली संतान के रूप में भव्यात्मा पुत्र रत्न का जन्म हुआ
नाम हुआ *पंकज* जो बचपन से धर्म संस्कारो से परिपूर्ण धीर गम्भीर व गहन चिंतन स्वभावी थे।
आपका लालन ,पालन व शिक्षण आपके ननिहाल *उज्जैन नगरी* में मामा सुनील जी सोगानी के घर *नाना-नानी के दुलार व सरक्षण में हुआ।*
आपने बीकॉम ,कंप्यूटर इंजीनियर के साथ *चार्टर एकाउटेंट की शिक्षा पूर्ण की*,जिससे आपको कुशल सीए के रूप में उच्च सर्विस की प्राप्ति हुई लेकिन आपमें सदैव सत्य व स्वयं का चिंतन सतत बना रहता था,आप ये जान चुके थे कि ये नाम,शरीर सब नश्वर है अतः मुझे सत्य को जानकर मोक्ष रूपी श्रेष्ठ पद को पाना है
इसी समय तपस्वी *आचार्य श्री कुशाग्रन्न्दी नन्दी गुरुदेव* का आगमन हुआ जिनकी प्रेरणा से आपके अंतर्मन में जमा हुआ वैराग्य का बीज अंकुरित होने लगा और आपने उनसे *आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया।*

21वी सदी के प्रथम वर्ष में ही प्रज्ञायोगी *आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव ससंघ* का राजस्थान से मध्यप्रदेश की ओर प्रवास हुआ जहाँ युवा ब्रह्म पंकज भैया ने सर्विस व गृह त्यागकर गुरु संघ से जुड़कर धर्म शिक्षार्जन करने लगे।

*सन 2002 में महाराष्ट्र की औरंगाबाद नगरी* में *आचार्य श्री गुप्तिनन्दी गुरूदेव* ने आपके संयम मार्ग पर बढ़ने की तीव्र ललक को देखते हुए *क्षुल्लक दीक्षा* प्रदान की नाम
क्षुल्लक जी गुरु संघ में निरन्तर साधना अभ्यास के साथ संघ में पूर्व से सम्मिलित किशोर वयी ब्रह्म. कपिल भैया
जो आपसे स्नेह व प्रेरणा को पाकर सत्य पथ पर वृद्धिगत होते रहे उन्हें आप सदैव अनुज के समान वात्सल्य मार्गदर्शन देते

सन 2006 में आपने गुरु श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव को आत्मकल्याण के लिए परम आवश्यक मुनि दिक्षा हेतु निवेदन किया
*आचार्य श्री ने भी होनहार दक्ष क्षुल्लक जी को 2 मार्च 2006 को औरंगाबाद नगरी में मुनि दीक्षा प्रदान की*

*लोक पूज्य नाम हुआ मुनि श्री सुयशगुप्त जी गुरुदेव*

आपकी ओजस्वी व प्रभावशाली प्रवचन शैली व सारभूत स्व रचित मुक्तक जन जन को नत मस्तक कर देती है
आप भी अपने अद्वितीय क्षमता से अनेक विधान,स्तोत्र व पूजाओं की रचना कर चुके है

आप दादा गुरु *स्वाध्याय तपस्वी वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरुराज* को *उच्च आदर्श* मानकर सतत अध्ययन,अध्यापन व स्वाध्याय में रत रहते है

आप धरती के समान गम्भीर,आकाश के समान व्यापक व अत्यंत उदार है आपकी अदभुद तेजस्वी आभा महान पूर्वाचार्यों की झलक दिखाती है

निश्चित ही 21वी सदी के महान संत जो जैन दर्शन का गौरव बढाएंगे उनमे आपका नाम अग्रणी रहेगा ऐसा पवित्र ओरा आपके व्यक्तित्व व साधना में प्रकट होता है।

वर्तमान में यही पंकज भैया व कपिल भैया साक्षात देशभूषण व कुलभूषण भ्राताओं के समान मुनि श्री सुयशगुप्त जी व मुनि श्री चन्द्रगुप्त जी गुरुदेव के रूप में धर्म का शंखनाद कर रहे है

*नन्दी संघावली व आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव के ऐसे नायाब रत्न मुनि श्री सुयशगुप्त जी गुरुदेव की 45 वी जन्म जयंती पर अविनाशी नमन*

*🖊️शब्दसुमन-शाह मधोक जैन चितरी🖊️*

*नमनकर्ता-श्री राष्ट्रीय जैन मित्र मंच भारत*
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