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*जैन सन्तो के प्रति कर्तव्यनिष्ठ राणापुर, झाबुआ,थांदला, जोबट कुक्षी,सुसारी (एमपी) व कुशलगढ़ (राज) की जैन समाज-*
हमारे जैन सन्त राजस्थान कुशलगढ़ से बावनगजा या गुजरात महाराष्ट्र की ओर पद विहार करते है तब कुशलगढ़,थांदला, झाबुआ,राणापुर,जोबट, कुक्षी सुसारी नगर जैसे समर्पित श्रावको की नगरीया आती है,जहाँ पर हमारे साधु भगवन्तों के आहार-विहार हेतु इन नगरों की जैन समाज के मध्य पंथ-मत से रहित आपसी अत्यंत सुंदर सामंजस्य है।
हाल ही में आचार्य श्री विभवसागर जी,आचार्य श्री सुवीर सागर जी,आचार्य श्री गिरनार सागर जी,आर्यिका श्री सुनिधिमती माताजी,आर्यिका श्री सुदृढमती माताजी व क्षुल्लिका श्री विस्मिता श्री जैसे अनेक संघो का इन नगरियों से होते हुए बावनगजा के लिए विहार हुआ,जिसमे इन नगरों की साधुओं के प्रवेश-आहार व विहार के प्रति कर्तव्यनिष्ठा,एक नगर से दूसरे नगर तक पहुचाने की स्वव्यवस्था समस्त देश की जैन समाज के लिए अनुकरणीय है।
आर्यिका श्री सुनिधिमती माताजी ने कहा कि इन समस्त नगरों के साथ खासकर *राणापुर* जैसी अल्प जैन समाज के श्रावको का साधु भगवन्तों के प्रति अपना जो दायित्वों का निर्वहन है,वो अनुकरणीय व प्रशंसनीय है।इनके गुरुओ के प्रति भेदभाव रहित सेवाभाव निश्चित रूप से भविष्य में इन क्षेत्रों की समाज के चहुमुंखी विकास व खुशहाली का सूचक है।

*🖋️शब्दसुमन-शाह मधोक जैन चितरी🖋️*
*अनुमोदनकर्ता-श्री राष्ट्रीय जैन मित्र मंच भारत*
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