हमे देश के प्रति भी अपना धर्म निभाना चाहिए स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने संस्कारों की ओर जोर दिया और जीवन में संस्कारों को अपनाने की बात कही।
पूज्य गुरु मां ने कहा कि धन दौलत तो आनी जानी होती है, लेकिन संस्कार स्थाई होता है। हमें देश के प्रति भी अपना धर्म निभाना चाहिए। देश की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए टैक्स देना भी व्यवहार धर्म कहलाता है। हमारे दिए हुए टैक्स से ही सरकार हमारे लिए सुविधा व सुरक्षा मुहैया कराती है। पूज्य माताजी ने सत्यगुण व्रत के बारे में बताया, उन्होंने कहा कि अगर हम टैक्स नहीं भरते हैं तो हमें इस व्रत गुण का दोष लगता है। संसार में हमने जो कमाया है, वह यह ना समझे कि अपने लिए कमाया है। संचार के सारे रिश्ते नाते धन दौलत सब यही के लिए बने हैं।
वर्तमान परिपेक्ष पर कटाक्ष करते हुए माताजी ने कहा कि आजकल तो हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि घर के मुखिया की मौत के बाद शमशान में ही बटवारा होना शुरू हो जाता है।
गलती से मृतक के शरीर पर सोने चांदी की कोई वस्तु रह जाती है तो सबसे पहले उसे उतारा जाता है। इसका आशय समझाते हुए माताजी ने कहा कि हम जो कमा रहे हैं, उस पर तो दूसरों का अधिकार है। हमारे साथ तो कुछ जाने वाला नहीं है। हमारे साथ सिर्फ किया हुआ दान पुण्य ही जाएगा। इसीलिए हमें अपनी सामर्थ्य अनुसार दान सहयोग करना चाहिए यही हमारे काम आएगा, बाकी संसार की सभी वस्तु यही रह जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
