डॉक्टर कल्याण गंगवाल पुणे के निर्देशन में विद्या प्रमाण रेस्क्यू अभियान 14 जनवरी से 31 जनवरी तक
पुणे
शाकाहार जीवदया पशु पक्षी के संरक्षण में अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले डॉक्टर कल्याण गंगवाल पुणे के निर्देशन में सर्वजीव मंगल प्रतिष्ठान पुणे के संयोजन में उनकी टीम के श्री सुनील परदेशी, श्री सुनील गाडे द्वारा इस वर्ष भी परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से विद्या प्रमाण रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है जो 14 जनवरी से 31 जनवरी तक रहेगा।
यह रेस्क्यू अभियान इस बात की और भी इंगित करता है कि मांझा हटाओ और जान बचाओ यह अभियान माझे के द्वारा जो भी प्राणी पक्षी आदमी जख्मी होता है उसका निशुल्क इलाज यह संस्था करती है।
डॉक्टर कल्याण गंगवाल ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि मैं पिछले 40 वर्षों से जीव दया प्राणी रक्षा आदि के लिए कार्य कर रहा हूं मैं आपसे बात इसलिए करना चाहता हूं कि उत्तरायण चालू होने वाला है मकर संक्रांति आने वाली है और इस मकर संक्रांति पर बहुत प्राणी अपनी जान गवा देते हैं। एवं बहुत पक्षी अपनी जान गवा देते हैं। इसका कारण है यह पतंग महोत्सव पतंग महोत्सव हमारी परंपरा है, हमारे देश में अलग-अलग राज्यों में पतंग उड़ाने का मजा सभी लेते हैं। मगर यह मजा कुछ पक्षियों के लिए सजा बन जाता है।
गंगवाल ने बताई कुछ आवश्यक बातें
उन्होंने कुछ बातों को बताते हुए ध्यान आकृष्ट किया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम जो पतंग उड़ाने के लिए माझा उपयोग कर रहे हैं वह चाइनीस मांझा खतरनाक बनता जा रहा है पिछले 25 30 सालों में यह माझा हमारे मार्केट में आ गया है, यह नायलॉन का मांझा होता हैं इस पर कांच लगा होता है, हाथ से टूटता नहीं है मगर पतंग काटने के लिए लोग इसका इस्तेमाल करते हैं, और हजारों प्राणी हजारों पक्षी इस मांझे के कारण जख्मी हो जाते हैं और अपनी जान गवा देते हैं। पुरानी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले साल इस मांझे के कारण हजारों पक्षियों ने तो अपनी जान गवाई लेकिन 215 व्यक्तियों ने भी अपनी जान गवाई। उन्होंने डॉक्टर होने के नाते सभी से अपील की की इस मांझे का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे हजारों पक्षियों की तो जान चली जाती है, एक बार यदि यह मांझा उनके परो को लग जाता है तो उनके पंख कट जाते हैं और यदि गले में लग जाता है तो वह पक्षी मर जाते हैं। और हम कितना भी उसे रेस्क्यू करें हम उसकी जान नहीं बचा सकते। 





इसके लिए उन्होंने सर्वजीव मंगल प्रतिष्ठान के माध्यम से आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज की प्रेरणा से विद्या प्रमाण रेस्क्यू अभियान कई सालों से शुरू किया हुआ है, इसमें एंबुलेंस रखी जाती है उसमें सभी समान होते हैं और उसमें एक डॉक्टर भी होता है। और उसमें सामाजिक कार्यकर्ता रहते हैं और जहां-जहां भी पंछी घायल होते हैं उन्हें रेस्क्यू किया जाता है। फिर उन्हें रेस्क्यू सेंटर ले जाया जाता है उनका उपचार किया जाता है वापस उन्हें पर्यावरण में छोड़ दिया जाता है। यह इलाज निशुल्क किया जाता है झोपड़पट्टी एवं छोटी-छोटी झुग्गी बस्तियों में लोग रहते हैं जो इस मांझे के कारण घायल हो जाते हैं उन्हें भी रिस्क करके उनका उपचार निशुल्क करते हैं।
उन्होंने अपील की की ज्यादा से ज्यादा पंछियों को बचाने की कोशिश करें अहिंसा जीव दया के लिए हमें यह पशु पंछी बचाने है जो चीज हम दूसरों को दे नहीं सकते वह लेने का अधिकार हमें नहीं दिया है। कोई पंछी यदि मर गया तो हम उसे वापस नहीं ला सकते इसलिए हमें किसी की जान लेने का अधिकार नहीं है।
इस मांझे पर हाई कोर्ट ने बेन लगाया है
श्री गंगवाल ने बताया कि 1997 में नागपुर कोर्ट ने बेन लगाया है मगर आज भी वो मार्केट में है। एक जागरूक नागरिक होने के नाते हम लोगों को इसके बारे में मालूमात करा दे। पुलिस को इसके बारे में इन्फॉर्म करें जहां भी यह बिकता है वहां रेड डालने को कहे, अहिंसा के क्षेत्र में सक्रिय बने हम नकारात्मक हिंसा तो बहुत पालते हैं हमें अहिंसा के क्षेत्र में पुरुषार्थ करने की जरूरत है, जनमानस तक यह संदेश पहुंचाएं लोगों की जान बचाए क्योंकि यह मांझा जानलेवा है।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312




