तृतीया तो हर महीने आती है लेकिन अक्षय तृतीया साल में एक बार आती है प्रमाण सागर महाराज
गढ़ाकोटा
परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने शुक्रवार की बेला में धर्म सभा में अक्षय तृतीया के विषय में प्रकाश डाला महाराज श्री ने कहा कि आज की तिथि से हमने देना सीखा था। तृतीया तो हर महीने आती है लेकिन अक्षय तृतीया साल में एक बार आती है।
उन्होंने कहा इस दिन में दान जुड़ा है इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। राजा श्रेयांस के दान की महिमा का वर्णन है। हम धर्म तीर्थंकर के रूप में भगवान ऋषभ देव को मानते हैं। धर्म को आत्मसात करने के लिए देना आवश्यक है।





पूज्य श्री ने कहा कि गृहस्थ की सेवा दान से होती है। उन्होंने चार बातों पर विशेष प्रकाश डाला जिसमें दान क्यों, दान कब, दान कितना, दान कैसे कहां जाता है कि दान करने से दुर्गति दूर होती है।
पुण्य प्राप्ति के भाव से लोग दान करते हैं। दान करने से हमारे अंदर पवित्रता आएगी। और हमारा भाव सुधरेगा। दान का कम क्यों करना है। आई हुई लक्ष्मी सबको अच्छी लगती है, कमाया हुआ पैसा तो दिखता है, लेकिन उसके साथ किया हुआ पाप नजर नहीं आता। शरीर में मल लगता है तो तुम उसे दूर करने स्नान करते हो। उसके प्रति आसक्ति कम होती है। स्व का उपकार है। परोपकार की व्रति, पुनीत कार्य मानकर दान करोगे वह तुम्हारा परोपकार होगा। तुमने धन जोड़ा तुम्हारा निधन हो जाएगा।
जीवन भर दान करोगे तो तुम्हारा जीवन धन्य हो जाएगा अपने मन को टटोल कर देखो की हमारी रुचि केवल कमाने की है या फिर काम कर लगाने की। दानम दुर्गति नाशनम। जीवन को जितना उदार रखोगे तुम्हारा उतना ही उद्धार होगा। अवसर आने पर दान करो।
शास्त्रों के अनुसार उत्तम मध्य और लघुत्तम जोड़ जोड़ कर रखो और छोड़ कर चले जाओ। पहले तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान का पहला आहार अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। दीक्षा के 6 महीने बाद आहार को निकले क्रिया विधि किसी को मालूम न होने से सात महीने नो दिन और व्यतीत हो गए फिर हस्तिनापुर पहुंचे।
नगर के राजा श्रेयांस को पूर्व भव का स्मरण हुआ। राजा सोमप्रभ के साथ विधिवत पड़गाहन करके। इक्षुरस का आहार दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
