मुनि श्री सुधासागर महाराज श्री मुख से मंझार दिगंबर जैन मंदिर का नया नाम पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर हुआ
टीकमगढ़
नगर में पारसनाथ दिगंबर जैन मंझार मंदिर में मुनि श्री सुधासागर महाराज संघ सहित विराजमान है जहा प्रतिदिन महती धर्म प्रभावना हो रही है। पूज्य मुनि श्री की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में इस जिनालय के नव निर्माण की तैयारियां जोरों पर है। पूज्य मुनिश्री ने अपने श्री मुख से इस मंदिर का नया नामकरण करते हुए मंदिर का नया नाम पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर किया।
मंदिर का विवरण
पारसनाथ धाम मंदिर पाषाण से निर्मित होगा जो तीन मंजिल काहोगा। तीसरी मंजिल पर भव्य पाषाणकी चौबीसी बनेगी।शुक्रवार की बेला में मुनि श्री ने कहा की जब कोई व्यक्ति दुनिया को जानने का इच्छुक होता है तो उसके पास कुछ सूत्र होना चाहिए।जो उसे अच्छे-बुरे रास्तों का ज्ञान करा सकें।

विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि सबसे पहले उसे यह जानना जरुरी है कि मैं सही हूं या गलत । क्या हमारे पास सत्य को जानने की योग्यता है। जब स्वयं ही असत्य के रास्ते पर चल रहे हो तो सत्य को कैसे जान सकते हो।
मुनिश्री ने कहा कि जो स्वयं विक्षिप्त है, वह दुनिया को कैसे जान सकता है। जो स्वयं ही असमर्थ है वह समर्थवान
कैसे हो सकता है। अंधा व्यक्ति प्रकाश के स्वरुप को जान नहीं सकता,बहराव्यक्ति शब्दों का आनंद नहीं जान सकता। लंगड़ा व्यक्ति पहाड़ केरास्तों को नहीं बता सकता, पर्वत का
रास्ता नहीं बता सकता।

मुनिश्री ने कहा कि यहां अंधा व्यक्ति प्रकाश का वर्णन कर रहा है, विकलांग व्यक्ति पर्वत का रास्ता बता रहा है,,नशे में रहने वाला व्यक्ति सदमार्ग का रास्ता बता रहा हैं।

सबका स्वरुप क्या हे, वह बता रहा है। मुनिश्री ने कहा कि सबकोजानने के पहले अपनी आंखों काऑपरेशन कराओ। कम से कम सूर्यको देख सको, सूर्य के प्रकाश का आनंद ले सको। इसलिए सबसे पहले जैनागम में सम्यक दृष्टि बतलाया, सम्यक ज्ञानी बाद में।सबसे पहले अपनी दृष्टि शुद्ध करो,क्रिया बाद में शुद्ध होगी। उन्होंने कहाकि पहले अपनी सोच बदलो, तुम्हें क्या करना है, क्या नहीं करना है। यह देखो तुम्हे कौन से रास्ते पर चलना है। हमउन रास्तों पर चल रहे हैं। जहांमंजिल ही नहीं होती है। इसी कारणसे हम संसार सागर में भटक रहे हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
