सिद्धार्थ नगर समाजजन ने गुरु माँ विज्ञाश्री माताजी को प्रवास हेतु निवेदन करते हुए श्रीफल भेट किया
जयपुर
प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी भूषण आर्यिका 105 गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, वरुण पथ जयपुर में विराजमान है।
माताजी ससंघ सान्निध्य में श्री श्री जिनसहस्रनाम का मंगल पाठ, अभिषेक, शांतिधारा का आयोजन हुआ। तत्पश्चात प्रवचन सभा का आयोजन हुआ। अक्षय तृतीया का महत्व बताते हुए माताजी ने कहा कि – अक्षय तृतीया के दिन ही भ. आदिनाथ जी के द्वारा दान पर्व की परम्परा का उद्गम हुआ था।





भोग भूमि का काल व्यतीत होने के पश्चात् कर्मभूमि के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी बने श्रावक और श्रमण धर्म की परम्परा को अक्षुण्ण बनाने हेतु शिक्षायें दी। उन्हीं उपदेशों की पालना हेतु आज का यह पर्व अक्षय दान को लक्षित करता है। इस दिन के आहार दान का फल उत्तम पात्र 5 करोड़, 93 लाख, 98 हजार 206 मुनियों को देने के बराबर है।
उत्तम पात्र को दिया गया दान उत्तम भोगभूमि को दिलाता है, मध्यम पात्र को मध्यम भोगभूमि एवं जघन्य पात्र को जघन्य भोग भूमि का फल प्राप्त होता है। आज अक्षय तृतीया पर दिया गया दान अक्षय बन जाता है ।
कल प्रात: 9 बजे वरून पथ जैन मंदिर के प्रांगण में आर्यिका संघ का भव्य पड़गाहन महोत्सव होने जा रहा है।
सिद्धार्थ नगर जैन समाज ने पूज्य माताजी को अल्प प्रवास हेतु निवेदन करते हुए श्रीफल समर्पित किया ।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
