पाप के पंख नहीं होते मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज

धर्म

पाप के पंख नहीं होते मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज
दमोह
मनुष्य पाप को ज्यादा नहीं कर सकता,पाप के पैर नहीं होते वह दौड़ नहीं सकता, पाप के पंख नहीं होते, वह ज्यादा उड़ नहीं सकता ।दिन भर कोई व्यक्ति क्रोध नहीं कर सकता लंबे समय तक व्यक्ति खराब काम नहीं कर सकता अच्छे कर सकता है जिस तरह कोई व्यक्ति जीवन भर क्रोध के साथ नहीं रह सकता किंतु समता के साथ रह सकता है ज्यादा क्रोध करने से सिर्फ फट सकता है अथवा वह पागल हो सकता है।

 

 

उपरोक्त विचार निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन धर्मशाला में आयोजित अपने प्रातः कालीन प्रवचनों में अभिव्यक्त किए।

इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत अध्यक्ष सुधीर सिंघई महामंत्री पदमचंद आरके जैन कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संतोष सिंघई नवीन निराला सुनील वेजीटेरियन आलोक पलंदी संजीव शाकाहारी शैलेंद्र मयूर रानू पारस राजेश महेश दिगंबर विनय विनम्र आदि की उपस्थिति रही

 

 

 

 

इस अवसर पर मुनि श्री के पद पक्षालन का सौभाग्य सराफ परिवार को प्राप्त हुआ तथा शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य मुनि श्री निर्मोह सागर जी महाराज के परिवार जन को प्राप्त हुआ मुनि श्री को पड़गाहन कर आहार दान देने का सौभाग्य रितेश गंगरा परिवार को प्राप्त हुआ। 

मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में आगे कहा कि मनुष्य दुनिया को अपने अनुसार चलाना चाहता वह हर कार्य अपनी इच्छा अनुसार करना चाहता है। जिस तरह दीपक अपनी इच्छा अनुसार जलना चाहता है मनुष्य अच्छे कार्य तो करना चाहता है किंतु वह अपनी इच्छा अनुसार करना चाहता है। जिस तरह आंख देखना तो चाहती है किंतु अपनी इच्छा अनुसार कान अच्छा सुनना चाहते हैं किंतु इच्छा अनुसार हम मोक्ष जाना चाहते है। किंतु अपनी इच्छा अनुसार यही इच्छा सब किए पर पानी फेर देती है।

 

 

 

आचार्य उमा स्वामी जी ने इच्छा निरोध तप कहा है सयमी सम्यक दृष्टि वही है जिसने अपनी इच्छा का त्याग कर दिया इच्छा अनुसार कार्य करना खतरनाक है ऐसा व्यक्ति किसी क्षण इच्छा के वशीभूत होकर खुश हो जाए अथवा नाराज हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। जिस तरह रावण अपने भाइयों को बहुत चाहता था किंतु उसमें एक दुर्गुण था वह हर कार्य अपनी इच्छा अनुसार करता था उसकी इच्छा होती थी तो वह सिंहासन पर बिठा देता था। किंतु इच्छा विरुद्ध कार्य होने पर वह लात मार के भगा देता था। विभीषण के साथ उसने यही किया मनमौजी मनुष्य खतरनाक होते हैं उनका भरोसा नहीं किया जा सकता। मनमौजी इच्छा अनुसार कार्य करने वाला व्यक्ति स्थिर नहीं हो सकता।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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