मन के अंदर सहयोग की भावना होनी चाहिए स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

मन के अंदर सहयोग की भावना होनी चाहिए स्वस्ति भूषण माताजी
केशोरायपाटन
परम पूजनीय गुरु मां 105 स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने उद्बोधन में अहंकार से दूर रखने की बात करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है, जीवन को अगर स्वर्ग बनाना है तो अहंकार को समाप्त करना होगा। जिसने अहंकार को भुला दिया समझो उसके जीवन में शांति आ गई।

 

 

पूज्य माताजी ने आगे कहा कि की कोई संकट में हो तो हंसना नहीं चाहिए कई बार हंसी विनाश का कारण बन जाती है। एक उदाहरण के माध्यम से गुरु मां ने बताया कि कौरवों ने पांडवों की खूब हंसी उड़ाई, हर समय उनको नीचा दिखाने का प्रयास किया। वही हंसी कौरवों का विनाश का कारण बन गई। हमें दूसरों का उपहास कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह ज्यादातर मौको पर खतरनाक हो जाता है।

 

 

 

 

 

पूज्य माताजी ने आगे कहा कि मन के अंदर सहयोग की भावना होनी चाहिए। सहयोग कई प्रकार का होता है तन का मन का एवं धन का कटाक्ष करते हुए कहा कि व्यक्ति अपना समय निंदा करने में निकाल देता है। जबकि जितनी ऊर्जा निंदा करने में खर्च की जा रही है, उतनी ऊर्जा सही कार्य में लगाई जाए, तो उसमें कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं। प्रयास होना चाहिए कि अपने दिन की शुरुआत अपने आराध्य परमात्मा के दर्शन से की जाए। आज का मनुष्य इतना व्यस्त हो गया है कि तो देव दर्शन के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहा है। कोई कष्ट आ जाता है तो फिर उसके पास समय ही समय होता है ऐसा नहीं होना चाहिए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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