स्वस्तिभूषण माताजी सानिध्य में अतिशय क्षेत्र केशोरायपाटन में मुनि सुवृत नाथ भगवान का जन्म कल्याणक उत्साह के साथ मनाया गया। अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलने वाला जीवन में कभी परेशान नहीं होता स्वस्तिभूषण माताजी
केशोरायपाटन
अतिशय क्षेत्र केशोरायपाटन में मुनि सुवृत नाथ भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव स्वस्ति भूषण माताजी सानिध्य में भव्यता के साथ मनाया गया।
आपको बता दें यह क्षेत्र काफी प्राचीन है और यहां की भव्यता और यहां का अतिशय अलौकिक है। प्रतिमा दिव्य एवं अलौकिक है।

रविवार की बेला में जन्म कल्याणक महोत्सव के अंतर्गत श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा गुरु मां के सानिध्य में की गई। महामंडल विधान संपन्न हुआ, मंडल विधान होने के बाद श्री जी को पालकी में विराजमान कर भव्यता के साथ नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए श्री जी की शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें देशभर सेअनेक भक्त उपस्थित हुए।




श्री जी की शोभायात्रा में महिला दिव्य घोष आकर्षण का केंद्र बिंदु
पूज्य माताजी के सानिध्य में निकली श्रीजी की शोभायात्रा बहुत ही अलौकिक थी जो भव्यता की कहानी कह रही थी। शोभायात्रा के हर एक पल शोभायात्रा का हर एक क्षण अलौकिक था। श्रीजी की पालकी की आगे 10 घोड़े बग्गियों में इंद्र इंद्राणी बैठे हुए थे। युवा वर्ग हाथों में केसरिया ध्वज लेकर जय जयकार करते हुए चल रहे थे। संपूर्ण वातावरण धर्ममय दिखाई दे रहा था।

एवं हर वर्ग भक्ति में नृत्य करता दिखाई दे रहा था। जगह-जगह स्वागत द्वार भी बनाए हुए थे। और जगह-जगह श्री जी की आरती की गई। इस शोभायात्रा में बूंदी से आया महिला घोष सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था इस घोष की ध्वनि से वातावरण ऊर्जावान बना हुआ था।


हर कोई महिला शक्ति की इस प्रस्तुति की सराहना कर रहा था। लोक कलाकार घड़ी नृत्य कर रहे थे जो सभी को मंत्रमुग्ध कर गया। इस भव्य शोभायात्रा में आगे बनी हुई रंगोली सभी को हर्षित कर रही थी। इस भव्य समारोह में राजस्थान सरकार में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने भी आकर अपनी उपस्थिति दी। एवं गुरु मां का आशीर्वाद लिया। क्षेत्र कमेटी की ओर से मंत्री महोदय का स्वागत भी किया गया।

शोभा यात्रा संपन्न होने के उपरांत गुरु मां ने अपने उद्बोधन में कहा कि शरीर से ज्यादा प्रेम नहीं करना चाहिए, संग्रहण उतना ही करें कि जीवन चलता रहे। ज्यादा संग्रहण कर लिया तो आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। इसीलिए शांति चाहिए तो उतना ही संग्रहण करें की परिवार का पालन पोषण हो सके।
पूज्य माताजी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि जीवन में त्याग की भावना होनी चाहिए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि हमारे कर्म से किसी को कोई कष्ट नही पहुंचे। उन्होंने कहा कि अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलने वाला जीवन में कभी परेशान नहीं होता। इस जन्म में किए गए कर्मों का फल इसी जन्म में मिलता है। जन्म को सुधारना है तो अपने कर्मों को भी सुधारना होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
