कृष्ण व सुदामा की तरह मित्रता होनी चाहिए आदित्य सागरमहाराज

धर्म

कृष्ण व सुदामा की तरह मित्रता होनी चाहिए आदित्य सागरमहाराज
बूंदी
श्रुत संवेगी परम पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए अच्छे व्यवहार एवं सरल स्वभाव बनाने की बात पर जोर दिया

 

 

पूज्य श्री ने कहा जहां आजीविका का साधन, मित्र, रिश्तेदार ना हो वहां पर नहीं रहना चाहिए। व्यवहार कुशल व्यक्ति, अपने मीठेपन व सरल स्वभाव से रिश्तेदार, मित्र बना लेता है।

 

 

 

मित्रता के विषय में बोलते हुए महाराज श्री ने कहा की मित्रता कृष्ण सुदामा की तरह होना चाहिए। जब भी दोस्तों पर संकट आए तो श्री कृष्ण की तरह सहयोग करना चाहिए।

महाराज श्री ने अच्छे कर्मों से धन अर्जन करने की बात करते हुए कहा की अच्छे कर्मों से धन अर्जन करना चाहिए। धन से धर्म की प्रभावना रहती है। और उससे उसका अच्छा जीवन व्यतीत होता है। जो व्यक्ति गलत तरीके से धन कमाते हैं उसका धन उसी तरह से खर्च हो जाता है। गलत तरीके से कमाया गया धन घर में क्लेश पैदा करता है।

 

 

महाराज श्री ने सम्मान के विषय में भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा मनुष्य को जहां सम्मान मिले उसे वहीं रहना चाहिए। जहां सम्मान की चाह होती है वहा मान अभिमान आ जाता है। जिस जगह सम्मान की गुंजाइश नहीं हो वहां पर कभीनहीं जाना चाहिए। आज के व्यक्ति के आपाधापी जीवन के चलते लोगों के व्यवहार प्रभावित होने लगे हैं।

 

 

अपनापन का काम होता है जा रहा है। इस कारण से त्योहार में भी फीकापन आने लगा है। इसलिए अपनापन और इंसानियत को हमेशाजीवित रखें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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