आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज का समाधि दिवस भक्ति भावपूर्वक मनाया गया
बांसवाड़ा। 
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज का 37 वा समाधि वर्ष पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सानिध्य में उत्साह और भक्ति पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य धर्मसागर विधान मंडल की पूजन में चढ़ाए जाने अध्य का वाचन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने किया। विनयाजली सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि आचार्य श्री धर्म सागर जी गृहस्थ अवस्था से व्रती और निस्पृह रहे इंदौर की कपड़ा मिल में कपड़ा निर्माण की हिंसा कारण नोकरी छोड़ दी स्वयं ने व्यापार प्रारंभ किया केवल एक रुपए का मुनाफा होने पर वापस घर आकर धर्म ध्यान में लीन हो जाते ।अपने दीक्षा गुरु के सानिध्य को स्मरण कर भाव विभोर होकर बताया कि सन 1974 में भगवान महावीर स्वामी के 2500 वे निर्वाण महोत्सव में प्रमुख आचार्य होने से दिगंबर धर्म के सिद्धांतो का संरक्षण किया।

आप माला फेरने के लिए कंकर या चांवल के दानों से माला फेरते थे स्वयं के अभिवंदन ग्रंथ को हाथ में नही लिया । अधोषित सल्लेखना समाधि में क्रम से आहार सामग्री का त्याग करते रहे आपने 76 भव्य प्राणियों को संयम दीक्षा दी । जिसमे हमे भी सन 1969 में मुनि दीक्षा दी। अन्य साधुओं ने अपनी विनयांजलि प्रस्तुत कर गुणानुवाद किया । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 1008 श्री मुनिसुव्रत नाथ जिनालय में संघ सहित विराजित है प्रातः काल श्रीजी का पंचामृत अभिषेक हुआ मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी की गृहस्थ अवस्था के अनेक प्रसंग बताए जिन्हे सुनकर सब द्रवित हुए।दोपहर को आचार्य धर्मासागर विधान की पूजन श्रद्धालुओं द्वारा की गई। 3 मई को श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान का जन्म एवम तप कल्याणक आचार्य संघ सानिध्य में मनाया जावेंगा। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी ,9929747312
