जो रागी(सांसारिक प्राणी) होते है वे मेरा मेरा करते है, जबकि जो वैरागी (दिगंबर मुनि) होते है वे अपने पास परिगृह नही रखते आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
चंद्रगिरी तीर्थ पर रविवार की बेला में पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने घने जंगल में कई प्रजातियों के पशु, पक्षी आदि रहते हैं, जिनमें कुछ क्रूर और कुछ सात्विक भी होते हैं। उन्होंने कहा की शेरनी जब गर्भवती होती है तो प्रसव के लिए वह घने जंगल में ऐसे स्थान का कुछ चयन करती है जहां उसका पति शेर ना आए, यदि शेरनी को यह भनक भी लग गई कि शेर को इस स्थान का पता चल गया है तो वह अपना स्थान बदल देती है। जहां शेर कभी बहुत ही ना पाए।
इस कार्य के लिए शेरनी की कुछ सहेलिया भी मदद करती हैं। गुरुदेव ने कहा कि शेरनी जब वनराज को जन्म देती है तो उसका लालन पालन आदि करती रहती है, उसकी सुरक्षा के लिए चौकन्ना रहती है। शेरनी वनराज की बड़े होने तक उसका पूर्ण ध्यान रखती है और उसके पिता शेर से दूर रखती है। क्योंकि शेर जंगल का राजा होता है और वह किसी को अपनी जगह पद तक आने नहीं देना चाहता। इसका भावार्थ समझाते हुए कहा कि मनुष्य मैं भी कुछ घरों में देखा जाता है कि पिता अलग पार्टी में है, पुत्र अलग पार्टी में है। पति अलग पार्टी में, पत्नी अलग पार्टी में है। कोई भी अपना साम्राज्य किसी को नहीं देना चाहता, जो रागी(सांसारिक प्राणी) होते है वे मेरा मेरा करते है, जबकि जो वैरागी (दिगंबर मुनि) होते है वे अपने पास परिगृह नही रखते है। वे हमेशा आनंदित रहते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
