आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने जनता से मतदान करने को कहा चुनाव लोकतंत्र का आधार है, नीव है, जड़ है रीढ़ है आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज
सागर
वैज्ञानिक संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 निर्भय सागर महाराज तपोवन जैन तीर्थ बहेरिया तिराहा के समीप विराजमान है।
मंगलवार की अनुपम बेला में उन्होंने मतदान करने के लिए सभी से कहा उन्होंने इस पर विशेष उद्बोधन देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की सरकार, जनता के लिए, जनता के द्वारा होती है। मतदान करने का अधिकार पहले 21 वर्ष में दिया जाता था, लेकिन वर्तमान में 18 वर्ष में दिया जा रहा है। 18 वर्ष में मताधिकार करने की योग्यता प्राप्त हो जाती है।


महाराज श्री ने मताधिकार का अर्थ समझाया उन्होंने कहा कि मताधिकार का अर्थ राष्ट्र के नागरिक को वोट देकर अपने देश के नेतृत्व करने वाले प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार प्राप्त होता है। महाराज श्री ने कहा कि प्रतिनिधि चुने बिना लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं है। मतदान से सही प्रतिनिधि का चुनाव
होता है, और उससे देश का निर्माण होता है।


आचार्य श्री ने आगे कहा कि हर राजनीतिक परिदृश्य एक आकार होता है। मतदान का अधिकार प्राप्त होने से कोई भी व्यक्ति धर्म समाज देश और परिवार के हित में अपनी आवाज उठा सकता है। चुनाव लोकतंत्र का आधार है, नीव है, रीढ़ है। मतदान करना न केवल अधिकार है बल्कि एक राष्ट्रीय नागरिकता के नाते एक कर्तव्य भी है। उन्होंने आगे कहा कि मतदान से निर्वाचित व्यक्ति सशक्त, जवाबदेह एवं परिपक्व बनता है। चुनाव में सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक समानता प्राप्त होती है। मतदान से प्रत्येक नागरिक मजबूत बनता है। अपनी बात कहने और अधिकार करो प्राप्त करने की योग्यता हासिल करता है। कम मतदान लोकतांत्रिक प्रणाली को अवैध और अविश्वसनीय बनाता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को मतदान करना चाहिए।
इसलिए मैं समस्त नागरिकों से कहना चाहता हूं कि आप मतदान अवश्य करें। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को वैधता प्रदान करे और मजबूत बनाएं। महाराज श्री ने कहा कि जो मतदान नहीं करते उनसे कहना चाहता हूं कि यदि तुम्हें मतदान की लिस्ट हटा दिया जाए तो आपको कैसा लगेगा। मैं कहना चाहता हूं कि भारतीय संविधान में एक संशोधन होना चाहिए कि जो व्यक्ति लगातार तीन बार तक चुनाव में वोट नहीं डालता उसकी नागरिकता समाप्त कर देना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
