दमोह तो बड़े बाबा की देहरी के रूप में है अजीत सागर महाराज
दमोह
परम पूज्य मुनिश्री 108 अजीत सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए दमोह नगर वासियों को सौभाग्यशाली कहा।
उन्होंने कहा कि मनुष्य गति अति दुर्लभ है, इसी गति से हम अपना उद्धार कर सकते हैं। उच्च कुल प्राप्त होने के बाद भी यदि मनुष्य आत्म कल्याण का पुरुषार्थ नहीं करता है तो उसका जीवन व्यर्थ है।

महाराज श्री ने कहा कि जिनेंद्र भगवान का सानिध्य प्राप्त करके मुक्ति का मार्ग प्राप्त कर लेना चाहिए, स्वयं को ऐसे जीना चाहिए कि दूसरों को कष्ट दिए बिना जियो और जीने दो के सिद्धांत का अनुकरण होता जाए।




महाराज श्री ने कहा कि दमोह नगर बहुत सौभाग्यशाली है, जो उन्हें बड़े बाबा के चरण छाव में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। विशेष पुण्योदय के साथ ही यह सौभाग्य प्राप्त होता है।
महाराज श्री ने कहां की दमोह तो बड़े बाबा की देहरी के रूप में हैं। ऐसा महान पुण्य पाकर हमें अपनी दुर्लभ पर्याय को सार्थक बनाने की कोशिश अवश्य करनी चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312
