मानव साधन के पास और साधना से दूर :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

धर्म

मानव साधन के पास और साधना से दूर :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
जयपुर
प. पू. भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, गायत्री नगर – ए , महारानी फार्म , जयपुर में विराजमान है। भक्तों ने प्रात:कालीन श्री जिनसहस्रनाम महार्चना करने का लाभ प्राप्त किया। तत्पश्चात अभिषेक, शांतिधारा करने हेतु बढ़- चढ़कर भाग लिया।

 

प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को विज्ञा वाणी का उपदेश देते हुए माताजी ने कहा कि- इस मनुष्य ने अपने जीवन में क्या पाया है। घर , परिवार , दुकान, धन, साधन को तो पा लिया। पर ज्ञान, सहनशीलता और गुणों से विमुख हो गया। मनुष्य जन्म तो गुणों को पाने के लिए मिला है,गवाने के लिए नहीं।

 

 

 

 

विज्ञान के साधनों का उपयोग कर मानव साधना से दूर होता जा रहा है।
रेणु अभिषेक बडजात्या सपरिवार ने गुरुमाँ की निर्दोष आहारचर्या कराकर अक्षय पुण्य का संचय किया सभी साधर्मी बंधुओं ने स्वाध्याय, गुरुभक्ति, आनंद यात्रा एवं आरती आदि शुभ क्रियाओं में सम्मिलित होकर धर्मलाभ लिया।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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