आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की विनीत चंद्र के रूप में दो चेतन कृतियां
कुंडलपुर
विश्व वंदनीय आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज ने ने जैन धर्म की ध्वजा को पुलकित किया निश्चित रूप से गुरुदेव ने श्रमण परंपरा को अक्षम ने बनाए श्रमण परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने के साथ साथ गुरुकुल की परंपरा को भी जीवंत रखा जो उनके समाधि होने के बाद भी दिख रहा है।
जब कुंडलपुर में साधना की जीवंत प्रतिमूर्ति मुनि द्वय विनीत सागर महाराज, एवं चंद्रप्रभसागर महाराज जब साक्षात धर्म चर्चा करते दिखाई दिए तो देख कर निश्चित रूप से लग रहा था कि। साक्षात तप की प्रतिमूर्ति नजर आ रही है।






तपती धूप में ऐसी भीषण गर्मी है जहां हम पंखे कूलर एसी आदि में बैठे हैं होते हैं। लेकिन हमारे मुनिराज बिना किसी पंख बिना किसी ही ऐसी आदि के बगैर साधना कर रहे हैं। यह दृश्य सांझा करते हुए रामगंज मंडी के श्री प्रदीप सोनी ने बताया कि जब समस्त मुनि संघ के दर्शन एवं मुनि द्वय के दर्शन कर मन गदगद हो गया एवं मन सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।
तुम विश्व धर्म की सूरज हो,
तप त्याग की अद्भुत मूरतहो,
हे धन्य धन्य महिमा तेरी तम हरने वाले सूरज हो।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
