*माना कि जैन जाति नही धर्म है किंतु वर्तमान परिस्थितियों में जैन जाति भी हो दर्ज*
वर्तमान परिस्थितियों में अति आवश्यक है की जैन जाति भी दर्ज हो क्योंकि जब भी जैन महानुभाव की जाति लिखी जाती है तो वैश्य या महाजन आदि लिखा जाता है। यही सबसे बडी कमी है।
हमे अपने नाम के पीछे गोत्र से पहले जैन तो लगाना ही
चाहिए,किन्तु इस बात पर भी ध्यान देने की अति आवश्यकता है। आपको मेरे विचार संकुचित लगे लेकिन इस समय संख्या बल दिखाना अति आवश्यक है और वह इसी हिसाब से दिखाया जा सकता है। कुछ स्थितिजन्य परिवर्तन अति आवश्यक होते हैं और उन परिवर्तनों को स्वीकार कर भी लेना चाहिए। बाकी आपकी अपनी अपनी सोच अपनी-अपनी विचारधारा है और उसी के अनुसार आप इस पर भी अपने विचार रखेंगे और इस विषय पर विस्तृत चर्चा होनी भी बड़ी आवश्यक है।
संजय जैन बड़जात्या कामां
