HND जैन बोर्डिंग एवं मंदिर संरक्षण एवम बेचे जाने के विरोध में हुआ लाक्षणिक उपोषण अनशन

धर्म

HND जैन बोर्डिंग एवं मंदिर संरक्षण एवम बेचे जाने के विरोध में हुआ लाक्षणिक उपोषण अनशन
पुणे
विजया दशमी पर, HND जैन बोर्डिंग परिसर के बाहर एक दिवसीय लाक्षणिक उपवास का आयोजन किया गया।
इस उपवास का उद्देश्य जैन समाज के बीच बोर्डिंग एवं मंदिर को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों का शांति और संयमपूर्वक खंडन करना, तथा पूरे सकल जैन समाज को एकजुट होकर इन धरोहरों के संरक्षण हेतु प्रेरित करना था।

 

 

 

इस अवसर पर पुणे के समस्त दिगंबर एवं श्वेतांबर जैन ट्रस्टियों ने एक मंच पर आकर Hostel और मंदिर को संरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प लिया और तन-मन-धन से सहयोग देने का आश्वासन दिया।

अनशन पर बैठे शाकाहार के प्रचार प्रसार में अग्रणी डॉक्टर कल्याण गंगवाल ने बताया कि हालांकि यह आयोजन सफल रहा, परंतु हमारी यह यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है।अब आवश्यकता है कि देश-विदेश में रहने वाला संपूर्ण जैन समाज जागरूक होकर इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी करे। उन्होंने कहा कृपया यह न भूलें:समाज को नुकसान बुरे लोगों की वजह से नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की चुप्पी से होता है।

   

यह तो केवल एक शुरुआत है। अब हमें पूरे जैन समाज को साथ लेकर इस संघर्ष को न केवल लड़ना है, बल्कि विजयी भी होना है।हम समस्त भारतवर्ष और विदेशों में निवासरत जैन पदाधिकारीगणों एवं श्रद्धालु श्रावकों से निवेदन करते हैं कि वे इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आंदोलन में आगे आएं और अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करें।

 

 

 

विस्तृत जानकारी देते हुए डॉक्टर कल्याण गंगवाल ने बताया कि HND हॉस्टल के बाहर हमने 2 अक्टूबर के दिन अनशन किया जो सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक रहा जिसमें मैं स्वयं डॉ कल्याण गंगवाल, योगेश पांडे , चंद्रकांत पाटील, अण्णा पाटील, सुकोशल पाटील, स्वप्नील गंगवाल, आनंद कांकरिया वे सभी लोग जो इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं वह सभी इस अनशन में शामिल रहे।       

अनशन के कारण को बताया
गंगवाल ने बताया कि मंदिर समिति एवम ट्रस्टियों ने जो गैर कानूनी कार्य किया है हॉस्टल की जमीन बेच दी है इसके बारे में भी इस अनशन के समय चर्चा हुई आगे इस अभियान को कैसे चलाना है इस पर भी मंथन हुआ। इस बात का डर है कि यदि वे लोग सफल हो जाते हैं मंदिर की जमीन को बेचने में भारतवर्ष में कई ऐसे ट्रस्ट हैं जहां छोटे गांव में उनकी देखभाल करने वाला भी नहीं है, मगर यह ट्रस्टी चैरिटी कमीशन की अनुमति लेकर बेच देते हैं तो बहुत बड़ी मुश्किल हो जाएगी पहले भी पुणे में कस्तूरबा ऑडिटोरियम के ट्रस्टीयो ने उसे भी भेज डाला उस समय हमसफर नहीं हो पाए क्योंकि बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ उनके साथ थे। आज भी यह हॉस्टल बेचा जा रहा है यह करतूत बहुत शर्मनाक जिस पवित्र भावना से हीराचंद नेमीचंद दोषी जी ने यह ट्रस्ट हॉस्टल समाज के लिए बनाया था। समाज को सौप था आज यह जिनके ऊपर कोई भी धर्म संस्कार नहीं है यह लोग भूमि को बेच रहे है पैसे कमा रहे हैं। यह बहुत गलत बात है इसके लिए हमें लड़ाई लड़नी है हर एक मुनि को हर एक साधु को सबको जगाना है यह आगे कही भी हम सब साथ में मिलकर इनकी जो कार्यप्रणाली है उसे हम बंद करेंगे। यह लोग 2000 करोड़ की जमीन 213 करोड़ में बेच रहे हैं। वहां जो मंदिर है उसे भी नहीं बताया और जगह को प्रार्थना भवन बताया है। जिस तरीके से इन्होंने सब किया है राजनीतिक क्षेत्र से जुड़ी हुई हस्तियां भी इसमें शामिल हैं इस आंदोलन को करने के लिए पुलिस ने हमें जगह देने से भी इंकार कर दिया था लेकिन मगर 2 घंटे उनसे चर्चा करने के बाद उन्होंने इसकी अनुमति दी करीबन इस अनशन में हजार से अधिक लोग यहां बैठे रहे हर एक ने अपनी भावना व्यक्त की और हर एक ने इस मुहिम के लिए आश्वासन भी प्रदान किया लड़ाई लड़ो हमारी ओर से तन मन धन से सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने मीडिया के लिए कहा कि इसके माध्यम से लोगों को जगाए और लोगों को जागरूक करें यह लड़ाई केवल ट्रस्टियों के साथ ही नहीं है। आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए जिन्होंने हॉस्टल बनाएं जहां जैनत्व के संस्कार दिए जाते हैं यह जैनत्व के संस्कारों पर हमला है। यह लड़ाई 2 दिन की लड़ाई नहीं है यह लड़ाई हम अंत तक लड़ेंगे क्योंकि सत्य हमारे साथ है। हमारे साथ सत्य है धर्म है और यह लड़ाई हम अंत तक लड़ेंगे।

     

HND हॉस्टल का सत्य सच जानिए।
सार्वजनिक संपत्ति – बिक्री के लिए नहीं !
सेठ हीराचंद नेमीचंद दोषी स्मारक ट्रस्ट एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। हॉस्टल और जैन मंदिर समाज की संपत्ति हैं ट्रस्टी केवल संरक्षक हैं,मालिक नहीं।


२. बेचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं
१९५८ की ट्रस्ट डीड में संपत्ति बेचने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसी कोई भी बिक्री अनधिकृत और अवैध है।
३. मंदिर को जानबूझकर छोड़ा गया बाहर
डील को छिपाने के लिए जैन मंदिर को रिकॉर्ड, आवेदन और समझौते से बाहर रखा गया।
४. मंदिर पर तोड़फोड़ का खतरा
बिल्डर की लेआउट योजना में जैन मंदिर को तोड़ने की बात साफ दिखती है।
५. सौदा अभी पूरा नहीं हम रोक सकते हैं!
बिल्डर ने अभी तक पूरी राशि नहीं दी है और सेल डीड भी पंजीकृत नहीं हुई ।
अभी भी समय है, कदम उठाइए!
६. चैरिटी कमिश्नर से झूठे दावे
ट्रस्टियों ने गलत तरीके से संपत्ति को जर्जर और फंड की कमी बताई
ये सभी भ्रामक और असत्य दावे हैं।
७. ट्रस्ट के पास पहले से पर्याप्त फंड थे !
ट्रस्ट के पास बिक्री की अनुमति मांगने से पहले ही ९.७ करोड़ की अधिशेष राशि थी।
८. १४.५ करोड़ अन्यत्र स्थानांतरित
ट्रस्ट ने हॉस्टल या मंदिर के रखरखाव के बजाय १४.५ करोड़ वॉलचंदनगर इंडस्ट्रीज़ नामक समूह कंपनी को स्थानांतरित कर दिए।
९. षड्यंत्र की बू आती है
ये सारे कृत्य जनविश्वास से विश्वासघात की सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करते हैं।
अभी कदम उठाइए – हमारी धरोहर और पवित्र मंदिर को बचाइए !
पारदर्शिता की माँग कीजिए । अवैध बिक्री रोकिए ।
आगे आइए और HND हॉस्टल व जैन मंदिर की रक्षा कीजिए।

       अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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