अन्तर्मना उवाच* (29 मार्च!)आत्म विश्वास ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और अविश्वास सबसे बड़ी असुरक्षा..!
इस एहसास को अपने जहन में भर लें कि हम अकेले आये हैं
और अकेले ही जायेंगे। *आपकी ज़िन्दगी ही आपका सफर है,, यदि इस सफर में आप अपनों के साथ चलने की उम्मीद करते हैं या रखते हैं, तो आप सफल यात्री नहीं है।* अपने मन से इस गलतफ़हमी को दूर करना होगा, कि आपकी कोई मदद करेगा।
यह कड़वा सच है कि आपकी खुशी में किसी का कोई भी योगदान नहीं है, वनस्पत खुद के।




जो भी सुख-दु:ख मिल रहा है, खुशी-आंसू मिल रहे हैं, अपने – पराये हो रहे हैं,, वो सब आपके ही कारण से हो रहे हैं।* इसलिए हम जितना बिन अपेक्षा का जीवन जीयेंगे, उतना ही सुख शान्ति से समृद्ध होंगे। *ये दुनिया आप पर कभी भरोसा करने वाली नहीं है, और यदि भरोसा कर भी लेगी तो उससे जल्दी भरोसा तोड़ भी देगी।* इसलिए उनके भरोसे और अपनों के भरोसे अपना अच्छा खासा जीवन खराब मत करो।
*खुद का भरोसा इस जीवन से पार लगायेगा, अन्यथा आपके अपने लोग ना जीने देंगे, ना मरने…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
