अपने जख्म उन्हें नहीं दिखना चाहिए जिनके पास मलहम नहीं होता आर्यिका 105 गुणमति माताजी
दमोह
दमोह में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत रविवार की बेला में पूज्य आर्यिका 105गुणमति माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में बहुत गम होते हैं, अपने जख्म उन्हें नहीं दिखाना चाहिए, जिनके पास मलहम नहीं
होता, वे घाव को और गहरा कर देते हैं, वह दुख को कम नहीं करेगा, उसे बड़ा जरूर कर देगा, क्योंकि दुनिया का हर व्यक्ति डॉक्टर नहीं होता, जब जीवन में चारों तरफ अंधेरा हो कोई रास्ता ना दिखाई देता हो तो एक बार सिद्ध भगवान की आराधना अवश्य करनी चाहिए।
माताजी ने मैना सुंदरी का उदाहरण देते हुए कहा कि मैना सुंदरी ने कोड़ी पति मिलने के बाद भी अपना दुख किसी को प्रकट नहीं किया। सीने में दुखों को रखकर मुस्कुराती रही।





हंसते-हंसते मुस्कुराते हुए अपने कर्मों को सहन किया और सिद्ध की आराधना कर सिद्ध चक्र महामंडल विधान रचाया और अपने पति के कुष्ठ रोग को ठीक कर दिया। इस विधान का महा चमत्कार है बड़े-बड़े उपसर्ग क्षण में टल जाते हैं। यह विधान का राजा कहलाता है। इसमें अनेक पूजाएं समाहित हैं।
माताजी ने आगे कहा कि जीवन में जब बहुत बड़े-बड़े पाप हो जाते हैं उनके प्रायश्चित के लिए पाप कम करने के लिए सिद्ध चक्र महामंडल विधान में आराधना की जाती है। इस विधान से पाप कट जाते हैं, और अनंत गुनी ऊर्जा प्राप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि संसार एक परीक्षा क्षेत्र है जिसमें हम सब परीक्षार्थी हैं दुख और कष्ट हर एक के जीवन में है दुखों को देखकर जो डरता है उसकी मुसीबत और बढ़ जाती है। ज्ञानी अपने दुखों को हंसते हुए काट लेता है। सच्चा सम्यक दृष्टि अपने दुखों को दूसरों पर नहीं थोपेता। इतिहास में यदि देखें तो सीता, द्रौपदी, अंजना जैसी महान विभूतियां ने अपने दुखों के लिए दूसरों को दोषी नहीं ठहराया। दुख हमारे जीवन में नमकीन की तरह हैं। जिसके जीवन में कांटों की चुभन नहीं वह फूलों के महत्व को नहीं समझ सकता।
माताजी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के विषय में बोलते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज कभी भी अपने कष्ट को दूसरों को नहीं बताते थे, उनकी वीतारगता, निष्प्रहता, निर्भीकता की मुद्रा हमे सदैव आकर्षित करती रहेगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
