किसी दूसरे को दबाकर नहीं दूसरे की दवा बनकर जियो। ऐलक श्री नम्रसागर महाराज
पृथ्वीपुर
परम पूज्य ऐलक श्री 105 नम्रसागर महाराज ने सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत धर्म सभा में कहा कि मनुष्य अगर इंसानियत का जीवन जीता है, और अपनी आत्म शक्ति को पहचान लेता है, तो चांद तारे भी नीचे रह जाते हैं।

और यदि वह विलासिता जीवन जीता है तो , नर्क तक पीछे रह जाता है। और उसके इस कृत्य को देखकर पशु तक शर्मा जाते हैं। जिस सीढ़ी से हम ऊपर चढ़ते हैं उसी से हम नीचे उतर सकते हैं।
मनुष्य जीवन वो सीढ़ी है, इससे हम सिद्धालय के दरवाजे भी





खटखटा सकते हैं। नगर के दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में बोलते हुए महाराज श्री ने आगे कहा कि इस देह में आत्म प्रकाश है। इसको प्राप्त करना तुम्हारी नियति है। स्वर्ग और नरक किसी दूसरे के हाथ में नहीं, हमारे हाथ में है। सुख दुख हमें अपने परिणामों से प्राप्त होता है। जीवन जीने का ढंग वही सार्थक करता है।
महाराज श्री ने कहा कि जीवन के कोरे कागज पर मधुर शब्दों से गीत बन जाएगा वह गाली लिखोगे तो तमाशा बन जाएगा। शब्द को लिखने वाली कलम हमेशा निरपेक्ष होती है। नूर तुम्हें प्राप्त हुआ है इसलिए उस शक्ति को तुम उद्घाटित करो। मनुष्य जब किसी दूसरे पर परोपकार करता है, तब देवता तक उसे नमस्कार करते हैं। किसी दूसरे को दबाकर नहीं दूसरे की दवा बनकर जियो। अपने जीवन की आंगन में ऐसा पुष्प जरूर लगाओ जिससे तुम्हारा आसपास का परिसर महक जाए।
अपने जीवन की दीवाल को इतनी ऊंची मत बनाओ की जन-जन की ओर तुम दृष्टिपात ना कर सको। चेहरे से हम भले इंसान जैसे लगे लेकिन अंतरंग से हमारी इंसानियत मिटती जा रही है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
