संस्कारी व्यक्ति ही संस्कृति को आगे बढ़ा सकते हैं गुरुमति माताजी
दमोह
सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत जैन धर्मशाला में आर्यिका 105 गुरुमति माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में संस्कृति एवं संस्कारों पर जोर दिया।

उन्होंने कहा की संस्कृति के संरक्षण के लिए शिक्षा संस्कार युक्त होनी चाहिए। संस्कारित व्यक्ति ही संस्कृति को आगे बढ़ा सकते हैं। माताजी ने कहा कि छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी संस्कारवान होना आवश्यक है।



माताजी ने युवा पीढ़ी को सीख देते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को मद ,मांस, मधु के साथ साथ नशीले पदार्थ के सेवन से भी दूर रहना चाहिए। 


सप्त व्यसन का त्याग और अष्ट मूलगुणों का पालन करना जीवन की उन्नति के लिए आवश्यक है। माताजी ने कहा कि संस्कार विहीन , लक्ष्यहीन शिक्षा कोई काम की नहीं है। ऐसी शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए जो शांति का मार्ग प्रशस्त करें। हिंसा से विश्व शांति संभव नहीं है। आज की वर्तमान परिपेक्ष पर बोलते हुए माताजी ने कहा कि आज हिंसा की ज्वाला में सारा विश्व जल रहा है। इसे आचार्य श्री द्वारा बताए गए अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही बदला जा सकता है। शांति का मार्ग मिल सकता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
