*अन्तर्मना उवाच* (19 मार्च)आज के वक्त में हद से ज्यादा अच्छा होना भी ठीक नहीं है बाबू..**वरना लोग आपकी अच्छाइयों से खेल जाते हैं..!*
*आज के वक्त में हद से ज्यादा अच्छा होना भी ठीक नहीं है बाबू..*वरना लोग आपकी अच्छाइयों से खेल जाते हैं..!*
आज के दौर में जो सबसे ज्यादा आड़े-तिरछे इन्सान होते हैं, वे सबसे ज्यादा सफल हो जाते हैं – चाहे धन की दौड़ में हो, शिक्षा की दौड़ में हो, व्यापार की दौड़ में हो, कर्ज लेने की दौड़ में हो, या राजनीति की दौड़ में हो। *जो सबसे ज्यादा आड़े तिरछे इन्सान हैं, वे सबसे ज्यादा सफल है।*




आज की राजनीति को देखो तो
*ओ माई गोड* और धन कमाने और कर्ज लेकर शौक पूरे करने वालों को देखो तो *ईश्वर अल्ला तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान।* आज आड़े-तिरछे चलना ही सीधा चलने जैसा हो गया है। जहां हम सुनते, सीखते आ रहे हैं कि कुशलता पूर्वक कार्य करो, कितने ही तिरछे चलो, पर मन्ज़िल तक पहुँचने का ध्यान रखो, कहीं से भी जाओ, येन केन प्रकारेण, वैसे भी तुमसे कोई नहीं पूछेगा कि यहां तक कैसे पहुंचे-? *यदि आप आड़े वं तिरछे मार्ग से मन्ज़िल तक ना पहुंच पाये, तो मुसीबत में पड़ जाओगे, और सफल हो गये तो सफलता सब पाप को धो देती है।* तो आज की सोच में सबसे बड़ा पाप है असफ़लता।
आज इन्सान के सभी पाप – माफ तब तक है जब तक वह पुण्य पर है। *परन्त बाबू, एक बात याद रखना — पानी में गोबर कब तक छुपेगा…!!!* नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
