विज्ञाश्री

धर्म

भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर बीलवा जयपुर में बढ़ा रही है धर्म की भव्य प्रभावना*

*संतो के सानिध्य में परमात्मा की भक्ति कर स्वयं परमात्मा पद को प्राप्त करो*

आर्यिका विज्ञा श्री

जयपुर/
भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी जयपुर के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर विमल परिसर बीलवा में ‌ धर्म की भव्य प्रभावना बढ़ा रही है , जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज जिनालय में प्रातः श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा ,एवं अष्टद्रव्यों से पूजा के शांति नाथ विधान की पूजा अर्चना शुरू हुई। कार्यक्रम में
28 दिवसीय शांति नाथ मंडल विधान 9 फरवरी को करवाने का सौभाग्य विशुद्ध वर्धिनी बहु मंडल प्रताप नगर सेक्टर 8 की महिलाओं को प्राप्त हुआ उन्होंने अत्यंत भक्ति भाव से पूजा अर्चना करके आनंद लिया गुरु मां ने उपस्थित मंडल को शुभाशीष देते हुए कहा की
भारतीय संस्कृति श्रमण संस्कृति और वैदिक संस्कृति ‌दोनो संस्कृति की मिली जुली संस्कृति है, इस भारतीय संस्कृति में संत और श्रावक ये दो तट है इन दो तटों के मध्य से धर्म की सरिता प्रवाहित होती हैं
संत भारतीय संस्कृति के प्राण पुंज ,गुणों के निकुंज अनंत गुणों के कुंज, दया करुणा के अनुपम भण्डार जन जन के उपकारी होते है जिनके जीवन में प्रत्येक कदम ,प्रत्येक चरण, आचरण से समन्वित है तथा एक महान आचरण का संदश देते है इस भारतीय संस्कृति को प्रवाहित करने वाले महान उपकारी होते है उन्होंने कहा संतो का सत्संग ही श्रावक के जीवन की पहली भक्ति है परमात्मा के पास पहुंचना ‌दूसरी भक्ति है


अतः संतो के सानिध्य में परमात्मा की भक्ति करके स्वयं परमात्मा पद को प्राप्त करो‌। कार्यक्रम समापन बाद आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।

राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्था

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