गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी के 55 वे संयम स्वर्णिम दीक्षा महोत्सव पर भाव भरी विनयाजली

धर्म

गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी के 55 वे संयम स्वर्णिम दीक्षा महोत्सव पर भाव भरी विनयाजली
परम पुज्या गणिनी गुरु मां 105 विशुद्धमती माताजी जिनका जीवन जिनकी साधना सभी के लिए आदर्श है।

 

पूज्य माताजी का आज हम 55 वा संयम स्वर्णिम दीक्षा महोत्सव मना रहे है। यह बहुत ही गौरव के क्षण है।

 

पूज्य गुरु मां अनेक आयामो को छुआ है। जो एक पर्याय है। इतनी उम्र में भी उग्र विहार कर जन जन का कल्याण कर रही है। अनेक बेटियों को दीक्षा देकर उन्हें मोक्षमार्ग पर आरूढ़ कर उनका जीवन धन्य किया। 

पूज्य माताजी साधना की सुमेरू है। पूज्य गुरु मां सदेव अपनी आत्म साधना में ही लीन रहती है।

 

 

पूज्य माताजी में बाल्यकाल से ही वैराग्य के लक्षण प्रस्तुति होने लगे थे उस उम्र में माताजी ने जब खेलने कूदने की उम्र में बच्चे होते हैं इस उम्र में माताजी ने कंदमूल का त्याग कर दिया। आगे चलकर वे साधना की ओर बढ़ती गई। और गिरनार गौरव आचार्य श्री108 निर्मल सागर महाराज से दीक्षा लेकर मोक्ष मार्ग की अग्रसर हो गई।

गुरु मां का आज हम 55 व दीक्षा दिवस मना रहे हैं। हम धन्य है कि ऐसी गुरु मां की जीवनकाल में हमारा भी जन्म हुआ है और उनके चरणों की सान्निधि उनकी आशीष हम सभी को प्राप्त हो रही है।
सद पथ बतलाती
वाणी विज्ञ कहलाती
मुक्तिपथ अनुगामी
हे गुरु मां विशुद्ध मति माताजी।
इनके चरणों मे कोटि कोटि वंदामी

पूज्य गुरु मां चरित्र की गंगा है, और ज्ञान की टकसाल है।
यही कामना करते हैं कि आपका संयम पथ और वृद्धि करें।
दीर्घायु हो, पूर्णायू हो, चिरायु हूं,
शतायु हो।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी रामगंजमंडी 9929747312

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