संयम की यात्रा से संसार से मुक्ति का मार्ग मिलता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
मूंगेड जिला डूंगरपुर
आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी का साबला से मूंगेड होते हुएमुनिश्री हित सागर जी,श्री शास्वत सागर जी की जन्म नगरी में आहार चर्या उपरांत आसपुर के लिए विहार हुआ ।
विहार के पूर्व मूंगेड नगर की धर्म सभा में देशना में बताया कि जीवन में यात्राएं अनेक प्रकार की होती है ।जब जीव जन्म लेता है उस दिन से जीवन यात्रा प्रारंभ होती है, जीवन अल्प या दीर्घ हो सकता है जीवन यात्रा कब समाप्त होगी नहीं कह सकते हैं ।जीवन में व्यक्ति अनेक कार्य ,अनेक यात्रा करते हैं सबसे बड़ी यात्रा मोक्ष मार्ग की यात्रा है, और मोक्ष मार्ग की यात्रा प्राप्ति के लिए जीवन में गुरुओं की संगति प्राप्त कर संयम की यात्रा प्रारंभ करना होती है।

प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी के परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजीत सागर जी के चरणों में मुंगेड के हीरालाल जी एवम श्री शंकरलाल जी ने अपना जीवन समर्पित कर संयम मार्ग को अपना कर गुरु चरणों में संयम यात्रा प्रारंभ की। मुनि श्री हित सागर जी और मुनि श्री शाश्वत सागर जी ने संयम की यात्रा गुरु चरणों में प्रारंभ की है। काफी वर्षों तक श्री अजीत सागर जी और हमारे संघ में मुनि श्री हित सागर जी साथ में रहे। हर प्राणी स्वास्थ्य और हित सुख चाहता है सही हित आत्मा का होता है जब हित का निर्णय लेता है तब उसे संसार से मुक्ति की भावना होती है तभी उसे शाश्वत हितकारी सुख की प्राप्ति होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की।आचार्य श्री ने आगे बताया कि शाश्वत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी है अनेक तीर्थंकरों अनंतानंत मुनियों ,जीवों ने सम्मेद शिखर जी से मोक्ष प्राप्त किया।सम्मेद शिखर जी पर आचार्य श्री ने प्रसंग बताया कि प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने दीक्षा के पूर्व गृहस्थ अवस्था में 32 वर्ष की उम्र में जब समय शिखर की यात्रा कर रहे थे तब एक असक्त कमजोर बुढ़िया को उन्होंने कंधे पर बिठाकर शिखर जी की यात्रा कराई ।बागड़ क्षेत्र से तीर्थ यात्रियों को निशुल्क शिखर जी की यात्रा कराई जा रही है यह महा पुण्य का कारण है। ऐसे व्यक्तियों को तीर्थ यात्रा कराई जा रही है जिन्होंने शिखरजी की यात्रा की कल्पना भी नहीं की है ।जीवन में प्रभु के दर्शन, तीर्थ के दर्शन ,और संयम का परिपालन कर संयम यात्रा प्रारंभ करना चाहिए । हमने जब दीक्षा हेतु आचार्य श्री शिव सागर जी को श्रीफल चढ़ाया तब हमे भी शिखर जी की यात्रा की प्रेरणा आचार्य श्री ने दी । श्री हित सागर जी और श्री शाश्वत सागर जी ने भी संयम की यात्रा प्रारंभ कर जीवन को सार्थक किया है सभी प्राणियों का लक्ष्य शाश्वत तीर्थ मोक्ष सिद्धालय प्राप्त करने का होना चाहिए शाश्वत तीर्थ की प्राप्ति रत्नत्रय ,संयम ,धर्म धारण करने से होगी। तीर्थ यात्रा से पुण्य लाभ होता है।



16 दिसंबर को आसपुर से विहार कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने रात्रि विश्राम सन राइज कालेज झल्लारा में किया दिनांक 17 दिसंबर की आहार चर्या त्रिमूर्ति पंच तीर्थ श्री अभिनंदन ध्यान केंद्र शेषपुर मोड़ में होगी
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
