व्यक्ति एवं समाज के लिए धर्म आवश्यक :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) में ससंघ विराजित गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के संसंघ सान्निध्य में 1008 दिवसीय श्री जिनसहस्रनाम का अखण्ड मंगल पाठ निर्विघ्न चल रहा है । जिसमें दूर – दूर से यात्रीगण आकर सम्मिलित होते हैं ।
प्रातः कालीन शांतिधारा करने का भी सौभाग्य भक्तजनों कक प्राप्त हो रहा है । जिसमें सोमवार की निर्विघ्न शान्तिधारा का अवसर गुरू भक्त जितेंद्र जैन भोपाल , महावीर हितेश छाबड़ा निवाई एवं आदर्श गंगवाल चाकसू वालों ने प्राप्त किया।
पूज्य माताजी की आहारचर्या कराने का सौभाग्य सारिकाजैन, श्रद्धा जैन, , प्रियांशी जैन , जितेंद्र जैन भोपाल सपरिवार एवं व्रती आश्रम के व्रतियों ने प्राप्त किया।
माताजी ने प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश के माध्यम से धर्म से जोड़ने का प्रयास करते हुए कहा कि- यदि मनुष्य धर्म की रक्षा करे तो धर्म भी उसकी रक्षा करता है। 
जो मनुष्य धार्मिक हैं वह दुख को सुख में बदलना जानता है भगवान का कोई धर्म नहीं है। 
धर्म एक आदत की तरह है, इसे स्वयं पालन करना आवश्यक है, न कि दूसरों को इसका पालन करने के लिए मजबूर करना।


जहाँ धर्म नहीं होता वहां विद्या, लक्ष्मी, स्वास्थ्य आदि का भी अभाव होता है। धर्मरहित स्थिति में बिलकुल शुष्कता होती है, शून्यता होती है। व्यक्ति एवं समाज इन दोनों के लिये धर्म आवश्यक है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312
