आदिनाथ अतिशय क्षेत्र भुसावर में हुआ आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ मंगल प्रवेशमुनि युधिष्ठिर सागर महाराज ने की आगवानी तो मुंडारा चौराहे पर हुआ प्रवचन*सुख शांति का रास्ता परमाणु बम से नहीं अणुव्रतों से निकलता है* आचार्य सुनील सागर

धर्म

आदिनाथ अतिशय क्षेत्र भुसावर में हुआ आचार्य सुनील सागर महाराज ससंघ मंगल प्रवेशमुनि युधिष्ठिर सागर महाराज ने की आगवानी तो मुंडारा चौराहे पर हुआ प्रवचन*सुख शांति का रास्ता परमाणु बम से नहीं अणुव्रतों से निकलता है* आचार्य सुनील सागर

भुसावर

पद विहार भगवान आदिनाथ और राम के काल से चली जा रही परंपरा है जब भगवान राम को वनवास हुआ था तो उस समय भी वह किसी वाहन में नहीं बैठे थे आज भुसावर नगरी में मुनि संघ का पद विहार करते हुए प्रवेश हुआ है कामां में पंचकल्याणक के कारण इधर आगमन हुआ है यह भूमि अतिशय से युक्त आदिनाथ भगवान की भूमि है। उक्त प्रवचन जैन आचार्य सुनील सागर महाराज ने भुसावर के मुंडारा चौराहे पर कस्बे में मंगल प्रवेश करते हुए व्यक्त किये।
आचार्य ने कहा कि भगवान महावीर का सिद्धांत जियो और जीने दो था तो वही रामायण में भी कहा गया है सियाराम में सब जग जानी करहु प्रणाम जोरी जुग जानी अर्थात सब में राम है और उन्हीं को सब कुछ मानना चाहिए। वर्तमान युग में अनेकों विकृतियों वाले मनुष्य दिखाई देते हैं जो महिलाओं की अस्मिताओं पर हाथ डालते हैं और गौ माता के मांस का भाषण करते हैं ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करना चाहिए आचार्य ने दिव्या संदेश देते हुए कहा छोटी सी जिंदगी फिर वैर किस लिए,इस छोटे से जीवन में क्यों किसी से बैर रखते हो शांति के साथ जीवन यापन करो खुद जिओ और दूसरों को जीने दो।
आचार्य ने समझाते हुए कहा कि शक्कर में मिठास ,निम्बू में खटास,भोजन में स्वाद और जीवन मे प्यार न हो तो सब बेकार है। आप ग्रहस्थ हो और गृहस्थ धर्म का पालन करें,परिवार से प्यार करें और सब की उन्नति में सहयोगी बने, कुछ ऐसा कार्य करें जिससे आपका जीवन धन्य हो।

 

 

 

मुंडारा चौराहे पर प्रवचन से पूर्व भुसावर कस्बे में आचार्य सुनील सागर महाराज का मंगल पदार्पण हुआ तो वहां पूर्व में विराजमान मुनि युधिष्ठिर सागर महाराज द्वारा भावभीनी आगवानी की गई।

 

भुसावर अतिशय क्षेत्र कमेटी के द्वारा पाद प्रक्षालन व आरती उतार कर मंगल प्रवेश कराया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भुसावर में विराजमान आदिनाथ भगवान के मस्तकाभिषेक भी किये।

 

 

 

 

इस अवसर पर मुनि शशांक सागर महाराज ने कहा कि दिगंबर संत

 

चलते फिरते तीर्थ होते हैं जिनकी संयम साधना बड़ी उत्कृष्ट होती है। इस अवसर पर स्थानीय जैन समाज के अतिरिक्त अन्य जैन समाजों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
संजय जैन बडजात्या कामां से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312

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