जीवन में जिसके गुरु नही उसका जीवन शुरू नही_ आचार्य सुंदर सागर
निंबाहेड़ा।
जीवन के जिसके गुरु नही उसका जीवन शुरू नही गुरु ही होते है जो स्व को देखने का दर्पण होता है यह विचार यहां विराजित दिग्मबराचार्य मुनि सुंदर सागर जी ने अपने प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। आचार्य श्री प्रतिदिन आदर्श कॉलोनी स्थित शांतिनाथ जिनालय में प्रवचन कर रहे है।

आचार्य श्री सुंदर सागर जी का कहना है कि मानव मात्र को मोक्ष की राह और संयम पथ पर चलने का मार्ग गुरु ही बताता है इसलिए मानव को गुरु की शरण में ही रहना चाहिए।

आत्म कल्याण के लिए भगवान के बताए मार्ग पर चलने की राह





एक गुरु जितने अच्छे से बता सकता है दूसरा और कोई नही बता सकता। गुरु ही उसका पथ प्रदर्शक बन उसे सम्यक दृष्टि बना सकता है। सम्यक दृष्टि बनने के लिए मानव को अपने जीवन में छः
आवश्यक तत्वों का प्रतिपादन करना बेहद जरूरी है। स्वाध्याय कर वह अपने जीवन को बेहद सुगम कर सकता है कषाय को मंद कर राग द्वेष को समाप्त कर सकता है गुरु के माध्यम से वीतराग देशना महावीर के काल में ही सुनने को मिलती है गुरु अपने प्रवचन के माध्यम से आगम की लिखी देशना की व्याख्या इसी लिए करता है प्राणी मात्र का कल्याण हो सके। नगर में विराजित आचार्य सुंदर सागर जी महाराज के संघ सानिध्य में प्रतिदिन जिनालय में शांति धारा, कलशाभिषेक, पूजन अनुष्ठान, आहारचर्या के अलावा प्रातः 9 बजे मंगल प्रवचन, दोपहर 3 बजे शास्त्र स्वाध्याय सभा, सायंकाल 6 बजे शंका समाधान प्रश्न उत्तर गुरुभक्ति आरती संत वृंदो की वेय्यावृति आदि धार्मिक कार्यक्रमो का आयोजन हो रहे हैं जिसमे बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग लेकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
मनोज जैन सोनी से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंज मंडी की रिपोर्ट 9929747312
