अन्तर्मना उवाच* (10 मार्च!)मछलियाँ भी खुश हो गयी यह जानकर..*आदमी भी आदमी को जाल में फंसाने लगा है..!*

धर्म

अन्तर्मना उवाच* (10 मार्च!)मछलियाँ भी खुश हो गयी यह जानकर..*आदमी भी आदमी को जाल में फंसाने लगा है..!*

*मछलियाँ भी खुश हो गयी यह जानकर..*
*आदमी भी आदमी को जाल में फंसाने लगा है..!*

*कुन्द कुन्द स्वामी ने कहा है — अप्पा सो परमप्पा* — हर आत्मा परमात्मा बन सकती है। *इसलिए किसी को बेचारा मत कहो।* यह प्रभु का अपमान है, *यह जगन्नाथ और पार्श्वनाथ का देश है।* इस जगन्नाथ और रघुनाथ के देश में कोई भी बेचारा और अनाथ नहीं है। यहाँ सभी नाथ और जगन्नाथ है।

 

 

 

*यहाँ सभी नाथ है, क्योंकि सभी प्रभु के साथ है।* पारसनाथ के बीच में कोई बेचारा और अनाथ नहीं है। राम और हनुमान के देश में कोई भी बेचारा और अनाथ नहीं है। यहाँ सभी नाथ और पारसनाथ है। अध्यात्म जगत में आर्थिक स्तर पर ना तो कोई छोटा है, और ना ही कोई बड़ा है। 

 

*भगवान महावीर ने कहा* — सभी आत्माएं समान है, सभी आत्मा एक जैसी है, जो मेरे भीतर है, वही तुम्हारे भीतर है। जो सन्त में मौजूद है, वही संसारी में मौजूद है। बस फर्क केवल अभिव्यक्ति का है। 

 

 

 

 

*संत की पवित्र शक्तियां अभिव्यक्त हो चली है, तो संसारी में यह शक्तियां अभी भी सोई हुई पड़ी है।* दीयों में फर्क है, ज्योति में कोई फर्क नहीं है। ज्योति सब दीयो में एक जैसी होती है। हिंदू, मुसलमान, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई, सब दीये हैं। दीये का आकार प्रकार अलग-अलग संभव है। मगर ज्योति में फर्क डालना नामुमकिन है।जो पिंड में है वही धाम ब्रह्माण्ड में है। इसीलिए कभी किसी का अपमान मत करो…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी 9929747312

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