आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज का उपकार दिवस गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में मनाया गया आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज की सोच वहां से शुरू होती थी जहां से हमारी सोच खत्म हो जाती थी स्वस्ति भूषण माताजी
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परम पूज्या भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज का उपकार दिवस समाधि स्थली दिगंबर जैन नसिया में मनाया गया। इस आयोजन के क्रम में सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था। जानकारी देते हुए अमित जैन ने बताया कि प्रातः है की बेला में मनीष भैया द्वारा लिखित आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज की भक्तिमयपूजन की गई। पूजन में भक्ति नृत्य करते हुए अलग-अलग मंडलों ने आकर्षक थाल सजाकर गुरु जी के चित्र के समक्ष अर्ध समर्पित किए।
एवं ब्रह्मचारिणी अनीता दीदी द्वारा लिखित आचार्य ज्ञान सागर महाराज चालीसा का पाठ किया गया। सभी भक्तों ने बढ़ चढ़कर आयोजन मे भाग लिया। पूजन उपरांत धर्म सभा आयोजित की गई जिसमें सर्वप्रथम आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण बाहर से आये भक्तों ने किया दीप प्रज्वलन के साथ ही उपकार दिवस का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।

बाहर से आये सभी भक्तों ने आचार्य श्री के जीवन के बारे में बताया

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और बताया कि किस तरह से जन जन को आचार्य श्री ने एक सूत्र में जोड़ा , सभी ने आचार्य श्री की विनयानजली दी और अपने अपने आचार्य श्री के साथ के अनुभव को साझा किया इस अवसर पर ब्रह्मचारी अनीता दीदी ने कहा कि आचार्य श्री के अंदर बहुत ही सरलता भरी थी। आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज जैनों के ही नही जन जन के संत थे। उन्होंने कहा कि जैन संस्कृति को समाहित करने के लिए सबको एक साथ किया। आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज में ज्ञान का भंडार था इसलिए दुनिया ने ज्ञान का सागर कहती है। मेरी भक्ति तो उन्हें अरिहंत कहती है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने कैरियर पॉइंट के द्वारा बच्चों को जोड़ने, इंजीनियर को जोड़ने, डॉक्टर को जोड़ने पत्रकारों को जोड़ने, वकीलों को जोड़ने आदि सम्मेलन आयोजित कर उन्हें एक सूत्र में बांधा और जैन धर्म की प्रभावना की। आयोजन में मंगलाचरण संगम मति महिला मंच ने किया। इसी के साथ पाठशाला के बच्चों द्वारा अभूतपूर्व प्रस्तुति दी गई जो सभी का मन मोह गई। वही सभी मंडलो ने पूजन में भक्ति नृत्य करते हुए अलग-अलग मंडलों ने आकर्षक थाल सजाकर गुरु जी के चित्र के समक्ष अर्ध समर्पित किए।

इस अवसर पर पूज्य स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि पेड़ ने कभी अपना फल नहीं खाया, बस ऐसा ही जीवन संतों का होता है। संत तप त्याग और साधना से संत बनते हैं। एक जीवन उनका भी और एक जीवन आपका भी। एक वह है जो जीवन से रस निचोड़ छोड़ लेता है, एक जीवन वह है जो घर गृहस्थी! में उलझा रहता है। आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज की सोच वहां से शुरू होती थी जहां से हमारी सोच खत्म हो जाती है। आचार्य श्री दुनिया को क्या बनाना चाहते थे, अगर वैसी दुनिया बन जाए तो दुनिया में दुख और तकलीफ खत्म हो जाएगी। आचार्य श्री ने सोच के साथ उसे प्रेक्टिकल करके भी दिखाया। उन्होंने वकीलों का, चार्टर्ड अकाउंटेंट का, इंजीनियरो का , पत्रकारों तक का सम्मेलन करा दिया।

माताजी ने कहा कि आचार्य श्री में दृढ़ता थी और विश्वास था। आचार्य श्री ने सब को इकट्ठा कर दिया। जब उन्होंने पहली बार वकीलों का सम्मेलन किया तब साथ वकील आए थे। उस समय किसी श्रावक ने उनसे कहा था आचार्य श्री रहने दो, पर आचार्य श्री में साहस था, आशा थी, दृढ़ विश्वास था। और आगे चलकर 80000 वकीलों का सम्मेलन हुआ। आप लोग अपने घर के लोगों को इकट्ठा कर लो कि कल विधान करना है दोनों को आना है तो आप लोग कहेंगे मैं तो मेरी जानू उनकी वह देख लेंगे। तुम दो लोग भी इकट्ठे नहीं हो पाते हो। और आचार्य श्री ने 80000 वकीलों को इकट्ठा कर दिया, जोड़ लेना और जोड़ देना दोनों बातें थी आचार्य श्री के पास, उन्ही की सोच के कारण आज हमारी समाज विकास कर रही है। और समाज में बड़े-बड़े कार्य हो रहे हैं। इसका श्रेय आचार्य श्री को ही देना चाहिए। वही जैन नर्सिया का माताजी के मुखारबिंद से अब नया नाम श्री दिगम्बर जैन शांतिनाथ कुंदकुंदाचर्या अतिसय क्षेत्र ज्ञान तीर्थ बारां हुआ
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट9929747312
