स्वस्ति धाम पर मुनिसुव्रतनाथ भगवान की कृपा एवम स्वस्ति भूषण माताजी की प्रेरणा से स्वाति धाम पर भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ मनीष भैयाज्ञान दान सबसे बड़ा दान स्वस्ति भूषण माताजी

धर्म

स्वस्ति धाम पर मुनिसुव्रतनाथ भगवान की कृपा एवम स्वस्ति भूषण माताजी की प्रेरणा से स्वाति धाम पर भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ मनीष भैयाज्ञान दान सबसे बड़ा दान स्वस्ति भूषण माताजी
बारा
परम पूज्या भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी जैन जोड़ला मंदिर स्थित संत भवन में विराजमान है। पूज्य माता जी के सानिध्य में दो दिवसीय आयोजन 7 मार्च एवं 8 मार्च को होने जा रहा है।

 

 

 

जानकारी देते हुए अमित जैन ने बताया कि 7 मार्च मुनिसुव्रतनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस है उस दिन जैन जोड़ला मंदिर से मुनिसुव्रतनाथ भगवान की पालकी जो जोड़ला मंदिर से होते हुवे रामद्वारा होते हुवे जैन नर्सिया पहुचेगी, वहाँ पर मुनिसुव्रतनाथ विधान होगा , विधान की संपत्ति के बाद भूगर्भ से निकली भगवान महावीर स्वमी के मंदिर के लिए भूमि पूजन ओर शिलान्यास होगा , ओर सम्पति पर सभी सर्वको का वत्सल्यभोज होगा । एवं 8 मार्च को आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज का उपकार दिवस मनाया जाएगा।

 

 

 

मंगलवार की बेला में पूज्य माता जी के सानिध्य में धर्म सभा का शुभारंभ हुआ धर्म सभा के शुभारंभ की बेला में आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन महिला शक्ति द्वारा किया गया एवं मंगलाचरण और लक्ष्मी जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर मनीष भैया ने गुरु मा की कृपा का बखान करते हुए स्वस्ति धाम के विषय में बताया उन्होंने बताया कि जब माताजी जहाजपुर पहली बार गई उस समय छोटा सा गांव था और विधान कराया तो बड़ी ही छोटी छोटी बोली हुई। वहा पर विधान कराया गया। फिर माताजी का विहार वहाँ से 20 km दूर हुवा ओर महावीर जयंती के दिन प्रतिमा निकली जिस की सूचना माताजी को भी मिली और जहाजपुर के समाजजन ने माताजी को जहाजपुर आने का निवेदन किया। फिर माताजी जहाजपुर आयी और सब जगह शासन और प्रशासन को फोन कर सूचना दी गई। उसके बाद प्रभु की मूर्ति को लेकर मंदिर लाया गया।

उस समय का वाकया बताते हुए मनीष भैया ने कहा कि जब या प्रतिमा को लाया गया तब पैसा नही था। फिर जैसे ही लोगो का पता चला फिर जगह देखी गई।ओर 12 बीघा जमीन ली गई। उसके बाद देखते ही देखते प्रभु का चमत्कार 57 बीघा में फैल गया। अब वहा एक ऐसा भव्य मंदिर बन कर तैयार हो गया। जो विश्व की एक अनुपम कृति बन गया। इस अवसर पर पूज्य माताजी ने अपनी वाणी से कृतार्थ करते हुए कहा कि ज्ञान दान सबसे बड़ा दान होता है इसकी व्याख्या करते हुए माताजी ने कहा कि
माताजी ने कहा कि एक व्यक्ति के पास ज्ञान है उसने ज्ञान अपने बेटे को दिया फिर दूसरे बेटे को दिया फिर तीसरे बेटे को दिया फिर सबको छोड़ते हुए दिया तो उसका ज्ञान बड़ा की घटा सभी ने कहाबड़ा। इसके बाद माताजी ने कहा कि हमेशा ज्ञान बढ़ता है इसलिए ज्ञान दान सबसे बड़ा दान है संसार की चीज देने से घटती है जबकि आत्मा की चीज देने से बढ़ती है। सांसारिक चीज देने से घटती है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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