जो बोयेगा वही पायेगा :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) में विराजमान श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ने प्रवचन सभा में उपस्थित प्रभुभक्तों को धर्मोपदेश देते हुए कहा कि – यदि आप चाहते हैं कि सभी आपसे प्रेम करें, तो प्रेम की शुरुआत पहले आपको करनी होगी क्योंकि प्रकृति का नियम है, जो बोया है, वही निकलेगा।
गरीब, दीन, बेजुबान मनुष्य और पशुओं से प्रेम करें। जैसे पैर में से काँटा निकल जाये तो चलने में मजा आ जाता है और मन में से अहंकार निकल जाये तो जीवन जीने में मजा आ जाता है।







गुन्सी की पावन धरा पर 108 फीट उत्तुंग कलशाकार सहस्रकूट जिनालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। दूर-दूर से यात्रीगण आकर क्षेत्र के दर्शनों का लाभ प्राप्त कर रहे है। विज्ञातीर्थ क्षेत्र के निर्माण का मुख्य उद्देश्य प्राचीन जिनालयों की सेवा, सुरक्षा एवं संवर्धन है। जैन इतिहास को सुरक्षित रखने का मुख्य आयाम इसकी विविध योजनाओं में अंतर्गभित है। भारतवर्षीय सकल दिगम्बर जैन समाज के लिए गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी की प्रेरणा से एक अनमोल धरोहर हम सबको मिलने जा रही है यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
