सहस्रकूट विज्ञातीर्थ पर मनाया गया श्री पद्मप्रभ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव
गुंसी
प. पू. भारत गौरव, श्रमणी गणिनी आर्यिकारत्न 105 गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ससंघ सान्निध्य में श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी के श्री शांतिनाथ चैत्यालय में श्री पद्मप्रभ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर भगवान की शांतिधारा कराने का सौभाग्य गुरुभक्त श्रावक श्रेष्ठी प्रेमचंद बडजात्या चौमूंबाग जयपुर एवं अशोक जैन जयपुर ने शादी की वर्षगांठ एवं जन्मदिन के उपलक्ष्य में प्राप्त किया। भगवान पद्मप्रभु के श्री चरणों में निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य भागचंद पाटनी विवेक विहार, जयपुर सपरिवार प्राप्त किया। तत्पश्चात् सकल दिगम्बर जैन समाज चौमूबाग एवं विवेक विहार जयपुर, उनियारा ने गुरुमाँ की आहार चर्या निर्विघ्न सम्पन्न कराने का परम सौभाग्य प्राप्त किया।
तत्पश्चात् प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को दया धर्म का उपदेश






देते हुए माताजी ने कहा कि – जीवन एक बांसुरी है, जिसमें छेद-ही-छेद है। किन्तु जिसने उसको बजाना सीख लिया उसका जीवन संगीतमय बन गया। उसी के समान भगवान व भगवंतों ने भी अपने जीवन में गर्भ जन्म, तप, ज्ञान का कल्याण कर अंतिम मोक्ष कल्याणक को प्राप्त कर जीवन को संगीतमय बना लिया। उनके चरणों में शतबार नमन हो ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
