सफल जीवन की आधार शिला – सही सोच विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
प. पू. भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ने भव्य जीवों को धर्म का सदुपदेश देते हुए कहा कि – सही सोच के अभाव

में आप कहीं भी सुखद जीवन नहीं जी सकते हैं।
सही सोच का होना बहुत आवश्यक है। सोच विपरीत होते ही आनंद समाप्त हो जाता है।



परस्पर की मधुरता कम हो जाती है। एक-दूसरे के प्रति समर्पण के भाव का अभाव हो जाता है। सही-सोच ही सफल जीवन की आधारशिला है। सही सोच से ही परस्पर की कटुता को समाप्त किया जा सकता है। भ्रम का निवारण यदि कोई कर सकता है तो वह सम्यक सोच से ही सम्भव है।
चाकसू महिला मण्डल एवं सहस्रकूट विज्ञातीर्थ के व्रती आश्रम के व्रतियों ने मिलकर पूज्य माताजी की आहारचर्या निर्विघ्न सम्पन्न कराने का सौभाग्य प्राप्त किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
