अन्तर्मना उवाच (26 फरवरी!)

धर्म

अन्तर्मना उवाच (26 फरवरी!)

छाछ में मक्खन हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन मक्खन में छाछ नहीं होना चाहिए।
कोयले में हीरा निकल जाये तो कोई बाधा नहीं, लेकिन हीरे में कोयला नहीं निकलना चाहिए।

 

 

 

*नाव* पानी में रहे तो कोई बाधा नहीं, लेकिन पानी नाव में नहीं आना चाहिए।

राजनीति* में धर्म हो तो कोई बाधा नहीं, लेकिन धर्म में राजनीति नहीं होना चाहिए।

सच है – मनुष्य जीवन दुष्कर है। मानवता और महानता इससे भी दुष्कर है। स्वयं के अस्तित्व व जीवन की सारी सुख, सुविधाओं को दांव पर लगाकर ही जीवन की महानता को प्राप्त किया जा सकता है। सिर्फ मनुष्य होना पर्याप्त नहीं है, जीवन में मनुष्यता भी आनी चाहिए। आज मानव तो बहुत है, लेकिन उनमे मानवता देखने को नहीं मिल रही है। तभी तो देश में, भय, आतंक की स्थितियाँ बनी हुई है।

मानव महान है। उसके पास बुद्धि का वैभव और प्रज्ञा की पैनी धार है। वह कोयलों की खान में से हीरे निकाल सकता है। मिट्टी और राख का सोना बना सकता है। मनुष्य कलाकार है, लेकिन उसे अपनी कला का प्रयोग मिट्टी के घरोंदे बनाने तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए; बल्कि आत्मा को परमात्मा भी बनाना चाहिए…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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