पुष्पगिरी तीर्थ पर आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज एवं तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज का हुआ महामिलन
पुष्पगिरी
14 जनवरी की अनुपम बेला एक नया सौगात लेकर पुष्पगिरी तीर्थ पर लेकर आई।
यह पल था गुरु शिष्य के मिलन का जी हां यह ऐसे महामना आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज जिन्होंने एक ऐसे तीर्थ का निर्माण किया है, जिसे आप और हम पुष्पगिरी तीर्थ के रूप में जानते हैं।

यह तीर्थ अपने आप में एक बहुमुखी तीर्थ के रूप में है जिसकी पहचान आज संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। ऐसे तीर्थ पर 14जनवरी पर गुरुदेव मंगल आगमन हुआ जिनकी आगवानी उन्ही के परम शिष्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने की।






वह क्षण अलौकिक था जब एक शिष्य गुरुदेव का हाथ पकड़ उन्हें लेकर आ रहा था इन छायाचित्रों को जो भी देख रहा है वह भाव विभोर हो जाता है। गुरु और शिष्य ने संघ सहित जिनालय के दर्शन किए। और नवनिर्मित मंदिर का भी अवलोकन किया जिसे आगामी दिनों में पंचकल्याणक होने जा रहा है।

जब पूज्य गुरुदेव की आने की सूचना जैसे ही पूज्य आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज को मिली वह हर्षित हो उठे और मन ही मन कहने लगे कल मिलने वाली खुशी आज मिल गई। वे इतने हर्षित थे गुरुदेव को लेने बीसाखेडी रोड पहुंच गए। और जैसे ही गुरुदेव को उन्होंने देखा वे हर्षित हो उठे। और श्रद्धापूर्वक गुरु के पास आते ही उन्हें शीश नवाकर उनके चरणों का वंदन किया। जो शिष्य का गुरु के प्रति विनय भाव को दर्शा रहा था।


पूज्य आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज बहुत ही भावुक है। अपने परम शिष्य को देख वह स्वयं भी भावुक हो उठे उनकी आंखें शिष्य को देख भीगी हुई थी। यह अपने आप में कहता है कि एक गुरु शिष्य के प्रति कितना वात्सल्य रखता है। यह यह एक महा मिलन नहीं अपितु विनम्रता और स्नेह को भी दर्शाता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
