पूज्य आचार्य समयसागर महाराज ने चंद्रगिरी तीर्थ पहुचकर गुरु समाधीस्थली को नमन करते हुए परिक्रमा की संत भवन मे कहा प्रभु के छुटे हुए कार्य को आगे बढाएगे
डोंगरगढ़
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से प्रथम दीक्षित शिष्य आचार्य श्री 108 समयसागर महाराज का चन्द्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ मे मंगल आगमन हुआ क्षेत्र कमेटी द्वारा उनकी आगवानी भी की गई उन्होने आचार्य गुरुदेव की समाधिस्थली को नमन किया और संघ सहित तीन प्रदक्षिणा भी दी काफी समय तक वे समाधिस्थली के समीप विराजित रहे गुरु का ध्यान किया उन्होने संत भवन मे कहा की प्रभु के द्वारा छुटे हुए कार्य को हम आगे बढाएगे
उन्होने एक संस्मरण सुनाया की वर्षायोग उपरांत गुरुदेव से संकेत मंगवाया की अब आगे के लिए संकेत दीजिए तब उन्होने कहा मै जिधर जा रहा हु पीछे पीछे आ जाना बडे भावुक शब्दों मे कहा मै

गंजबासोदा से पीछे पीछे चलता आ गया और आगे आगे आचार्य





महाराज बढ़ते गए और इस स्थान पर आकर केवल उनकी फोटो भर

देखने को मिली पूज्य महाराज श्री उस समय काफी भावुक थे मोजूद सभी संत एवम भक्तगण भी भावुक हो उठे उन्होने कहा आचार्य श्री जो कार्य किया वो आगमोक्त पद्दति से कार्य को बड़ी निरीहता के

साथ उन्होने कार्य किया है 50 55 साल उन्होने दीर्घकालीन आत्म साधना करते हुए मात्र भारत वर्ष के लिए ही नहीं समूचे विश्व के लिए वस्तु तत्व का जो प्रकाश दिया है न भूतो न भविष्यती है उन्होने कहा आचार्य महाराज ने संन 1968 दीक्षा ली थी उस समय मई नहीं था उनकी दीक्षा के कुछ दिनों के बाद उनके चरणों मे जाना का अवसर मुझे मिला उन्होने कहा आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज के साथ रहकर जो ज्ञान पाया वोह 500 साल से भी अधिक पाया आचार्य श्री के साथ हमे 45 वर्ष का सानिध्य हमे गुरुदेव का दीर्घकालीन हमे मिला लेकिन लगता है बहुत कम लगता है 17 नवम्बर 2014 की स्मृति को लाते हुए कहा की गुरुदेव ने हमको कहा कुछ समय बाहर रह्कर अनुभव कर लेना चाहिए ऐसे शब्द उन्होने कहे
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
