महामना आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की समता पूर्वक समाधि
डोंगरगढ़
अनेकों के जीवन प्रेरक ज्ञान ज्योति के पुंज महामना महासाधक आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की रात्रि की निशा में 2.30 बजे समता पूर्वक समाधि हुई।
ऐसे महासन्त थे जिन्होंने कलयुग में सदयुग जैसी शिष्य मंडली को तैयार किया एक ऐसे महासंत हुए जिन्होंने उत्कृष्ट साधक बनाए जो श्रमण परंपरा को जीवंत बनाए हुए है
आचार्य श्री ने गुरुकुल की पद्धति को बनाए रखा उनका संघ गुरुकुल ही है। वे जैन जगत के ही नही जन जन के संत थे। उन्होंने प्राणी मात्र के लिए अनेकों कार्यों को प्रेरणा दी जिसमे गोशाला का निर्माण, चिकित्सा के क्षेत्र में भाग्योदय तीर्थ का निर्माण पूर्णायू का निर्माण किया गुरुदेव साधना प्रहरी थे। स्वरोजगार, स्वालंबन के क्षेत्र में हथकरधा केंद्र की स्थापना की उन्होंने जेल में मोजूद बंदियों का जीवन परिवर्तित किया हमे अपना पुण्य मानना चाहिए की हम ऐसे गुरु के समय जन्मे हुआ। उनके द्वारा लिखे गए मूकमाटी महाकाव्य पर अनेकों शोध हो चुकी है आज और हो रही है। उनके काव्य ने अनेकों के जीवन को परिवर्तित किया है।
जैसे ही उनकी साधना थी वैसा ही उनके अंत समय में देखने को मिला गुरुदेव अस्वस्थ्य होने के बाद भी अपनी साधना में अडिग रहे। उन्होंने तीन के उपवास भी रखे आज ज्ञान सूर्य का अस्त हो गया ।
सोम छवि आंखों में करुणा हित मित प्रिय वाणी थी
अमृत धार भई जो जन जन कल्याणी थे
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
