पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ का हुआ नीमच नगर में मंगल आगमन संयम जीवन में धारण किए बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता विमल सागर महाराज

धर्म

पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ का हुआ नीमच नगर में मंगल आगमन संयम जीवन में धारण किए बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता विमल सागर महाराज
नीमच
परम पूज्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के परम शिष्य विमल सागर महाराज संघ का निंबाहेड़ा पंचकल्याणक संपन्न कर नीमच नगर में मंगल आगमन हुआ।

 

 

दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा को संबंध करते हुए पूज्य महाराज श्री ने कहा कि व्रत, उपवास तपस्या से सांसारिक दुखों के कर्मों का नाश होता है और पुण्य बढ़ता है। उन्होंने कहा कि संयम जीवनदान धारण किए बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता। 

मनुष्य जन्म संयम जीवन के लिए ही मिलता है। संयम जीवन का पालन संसार के दुखों से मुक्ति का प्रमुख आधार है। महाराज श्री ने कहा कि पवित्र मन से दान करने से मानव की आत्मा का कल्याण होता है। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन भी दुखों के विनाश का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि भोजन करते समय मौन और विवेक रखना चाहिए। भूख व प्यास को जितना घटाओ उतना घट सकती है, जितना बढ़ाओ बढ़ सकती है। इसलिए संयम का पालन करना चाहिए। रात्रि में अन्य का त्याग अवश्य करना चाहिए। तभी आत्मा को शांति मिल सकती है। छोटे-छोटे व्रत भी दुखों का नाश कर सकते हैं। व्रत का पालन करने से वाणी सिद्ध होती है। मृत्यु उपवास से नहीं ज्यादा भोजन करने से होती है। सूर्य के प्रकाश में ही शुद्ध और पवित्र आहार करना चाहिए। तभी हम स्वस्थ जीवन को प्राप्त कर सकते हैं।

 

   

 

 

शुक्रवार को मुनि श्री विमल सागर महाराज, मुनि श्री अनंत सागर महाराज, मुनि श्री धर्म सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 भावसागर महाराज का नया गांव से बिहार करते हुए प्रातः बेला में नगर प्रवेश हुआ कलेक्ट्रेट चौराहे पर पहुंचकर समाज जनौ ने महाराज श्री संघ अगवानी की। उन्हें गाजे बाजे के साथ जय जयकारों के बीच नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए जिन मंदिर लाया गया। जगह-जगह है उनकी आरती एवं पद प्रक्षालन किया गया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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