पशुओं की तरह आहार मत लेवे बल्कि मनुष्य जीव की तरह आहार लेवे आचार्य श्री पुलक सागर महाराज
डूंगरपुर
शहर में चल रही ऋषभ कथा के छठवें दिन क्रांतिकारी संत आचार्य श्री पुलक सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का कीड़ा होता है, भोजन भोजन में अंतर होता है। जीवन में विवेकी बने। पशुओं की तरह आहार मत लेवे। बल्कि मनुष्य जीव की तरह आहार लेवे। जैन धर्म का पालन करते हुए आहार और जल का सेवन करें।
महाराज श्री ने आज की रसोई पर भी कड़ी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की रसोई में प्राचीन चीजे गायब हो गई हैं, पहले वाले खाने में स्वाद होता था और पूर्ण भोजन सात्विक होता था अब तो घर के सभी सदस्यों के लिए अलग-अलग भोजन बनता है। श्रावकों को आहार विधि का ज्ञान नहीं होने की वजह से भगवान ऋषभदेव को किस तरह छह माह तक आहार प्राप्त नहीं हुआ था। 6 माह तक विचरण करने के पश्चात हस्तिनापुर पहुंचने पर राजा श्रेयांश को पूर्व जन्म ज्ञात होकर आहार विधि का ज्ञान होने से उनके द्वारा प्रथम आहार के रूप में इक्षु रस के रूप में भगवान ऋषभ देव को आहार दिया गया।


महाराज श्री ने कहा कि भगवान ऋषभदेव के आदर्श का पालन करते हुए अपने गुरुजनों के बताए हुए मार्ग पर चलने का ज्ञान

दिया गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य को ज्ञान अज्ञान का पूर्ण ज्ञान है वह अपने ज्ञान का प्रयोग करते हुए जैन धर्म की पताका फहराए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
