संतों का आगमन जहां सामान्य मौसम को बसंत बना देता है वही उनके आने से समाज में जागृति आती है स्वस्ति भूषण माताजी
शिवपुरी
परम पूज्या भारत गौरव गणिनी आर्यिका105 स्वस्तिभूषण माताजी का 14 दिन महती धर्म प्रभावना करने के उपरांत शुक्रवार को अतिशय क्षेत्र सेसई के लिए विहार हो गया।
मंगल विहार से पूर्व पूज्य माताजी ने शिवपुरी समाज की महती धर्म प्रभावना की सराहना अपने मंगल प्रवचन में की माताजी ने कहा की संतों का आगमन जहां सामान्य मौसम को बसंत बना देता है वही उनके आने से समाज में जागृति आती है। और लोग धार्मिक प्रवृत्ति के लिए आगे आते हैं। ऐसे में भले 14 दिन प्रवास शिवपुरी में रहा हो, लेकिन 14 दिन के प्रवास के दौरान जितने अधिक कार्यक्रम शिवपुरी में एक साथ हुए हैं।

उतनी कार्यक्रम 14 साल के इतिहास में अभी तक किसी भी नगर में नहीं हुए हैं। यह यहां के श्रद्धालुओं का समर्पण और धर्म के प्रति निष्ठा रही, जिसकी वजह से यह भक्ति भाव समाज में देखने को मिला।


ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने माता जी के 14 वर्ष पूर्व के इतिहास को बताते हुए कहा कि 14 वर्ष पूर्व जब 2010 में माताजी का आगमन शिवपुरी नगर में हुआ था तब यहां पर इतने कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो सका। हालाकि तब भी वह 15 दिन शिवपुरी में रुकी थी। अभी के 14 दिन के प्रवास में, जो कार्यक्रम में शिवपुरी समाज जुटी वह शिवपुरी के लिए यादगार हो गई।

धर्म सभा में बोलते हुए राजकुमार जैन जड़ी बूटी ने बताया कि जिस उत्साह के साथ शिवपुरी के समाज के लोगों ने माता जी की अगवानी की, व 14 दिन का माता जी का प्रवास वह हम सबके लिए यादगार रहेगा। समाज के साथ-साथ जैनतर समाज के लिए भी माताजी ने सद उपदेश दिया। यह शिवपुरी नगर के लिए गौरव की बात है।

धर्म सभा में बोलते हुए महामंत्री राजेश जैन राजू ने कहा कि
वात्सल्य में ही समर्पण आर्यिका माताजी का हम सबको प्राप्त हुआ। यही वजह रही की समाज की बाल, युवा, और वृद्ध तीनों पीढ़ी के लोगों ने माता जी की आगमन को जिस उत्साह से कराया, ठीक उसी तरह उनका बिहार उनकी विदाई एक ऐतिहासिक हो गई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
