श्रद्धा के बिना धार्मिक क्रियाएं करने का भी पुण्य मिलता है मुनि श्री विनम्रसागर महाराज
सागर/
श्रद्धा है नहीं, होती नहीं, होगी भी नहीं जैन कुल में पैदा होने के बाद मंदिर नहीं जाता या रास्ते से लौट आता है लेकिन जब श्रद्धा होती है तो वह व्यक्ति पत्थर की मूर्ति में दर्शन कर रम जाता है जबकि बिना श्रद्धा के धार्मिक क्रियाएं करने पर उन्हें आश्चर्यजनक फल मिलता है यह बात मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने समोशरण विधान के पहले दिन धर्म सभा में कहीं
उन्होंने कहा कि मंगलसूत्र मां बहने अपने गले में पहनती हैं लेकिन साधु अपने कंठ के अंदर रखते हैं और मंत्रों के माध्यम से बोलते हैं मंगल यानी जो आपके पाप को गला दे मुनि श्री ने कहा श्रद्धा के साथ जो धार्मिक अनुष्ठान करते हैं वे फलते फूलते हैं सोकर उठे और सबसे पहले णमोकार मंत्र पढ़ें, तपस्या करें, अहिंसामयी जीवन जिएंगे, वस्त्रो की भी अहिंसा होनी चाहिए सीता मैया शगुन शास्त्र की सबसे बड़ी ज्ञाता थी उनकी आंख फड़क रही थी तो उन्होंने कहा था की मंदिर में जाकर अभिषेक करो इसी प्रकार जब मंदिर में शांति धारा हो और साधु पढ़ रहे हो तो हाथ जोड़कर सुनना चाहिए क्योंकि अभिषेक शांति धारा का भी चमत्कार होता है पत्नी पति को मंदिर जाकर पूजन पाठ और अभिषेक शांति धारा के लिए हमेशा प्रेरित करती है ताकि रोज उनके भाव दर्शन करने के हो अभिषेक शांति धारा के हो जब तक जीवन है तब तक उसका उपयोग करो फिर पता नहीं जिंदगी कब समाप्त हो जाए।

मुनि श्री ने कहा हमारा पैसा किसी वैराग्य के निमित्त में लग जाए तो भक्ति की सार्थकता सिद्ध हो जाती है।


विधान के पहले दिन शांतिधारा संजय हुकुम जैन, विमल जैन मनोज जैन, कुशाग्र जैन राजीव जैन ने की। विधान के प्रमुख पात्रों में संजय जैन डाली सौधर्म इंद्र, राहुल बिलहरा कुबेर इंद्र, राजेंद्र केसली और सपन जैन निर्माण जंक्शन महायज्ञ नायक, देवेंद्र जैन डब्बू बाहुबली इंद्र, आकाश जैन चैनपुरा यज्ञनायक, दीपक मनोज धवोली, देवेंद्र जैन कर्रापुर, संदीप जैन पटना बने हैं।
मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया विधान प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे मंगलाष्टक के साथ प्रारंभ होगा 7 बजे शांति धारा होगी और उसके बाद पूजन विधान और मुनि संघ के प्रवचन होंगे। शुक्रवार की शाम को महाआरती आनंद स्टील परिवार की ओर से हुई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
