बड़वानी निमाड़ का सम्मेद शिखर जी =मुनि श्री अर्पित सागर जी मुनि अर्पित सागर जी और अपूर्व सागर जी का हुआ भव्य मंगल प्रवेश

धर्म

बड़वानी निमाड़ का सम्मेद शिखर जी =मुनि श्री अर्पित सागर जी
मुनि अर्पित सागर जी और अपूर्व सागर जी का हुआ भव्य मंगल प्रवेश
बड़वानी
बड़वानी निमाड़ का तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी है उपरोक्त उदगार चारित्र चक्रवर्ती परमपूज्य आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल परंपरा के पंचम पट्टाधीश वर्धमान सागर जी के सुशिष्य और निमाड़ गौरव अपूर्व सागर जी महाराज ने आज सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी के मंगल प्रवेश के उपरांत विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहे।

 

 

आगे मुनि श्री ने कहा की इस क्षेत्र को आचार्य कुंदकुंद स्वामी ने निर्वाण काण्ड की रचना की उसमे उल्लेख किया है ,

यह क्षेत्र हमारे अध्ययन करने पर ज्ञात होता है की बावनगजा नही बड़वानी सिद्ध क्षेत्र है वो तो बावनगज की भगवान की मूर्ति की वजह से इसका नाम बावनगजा पड़ गया और बावनगज याने चौरासी फुट ये अति मनोज्ञ प्रतिमा है। और भगवान आदिनाथ ने 84 लाख योनि तक रहे थे। 

इस लिए चौरासी फिट की मूर्ति है ,ये तीर्थ भगवान मुनिसुवतनाथ के समय का है और इस तीर्थ पर इंद्रजीत और कुंभ कर्ण ने कठोर तपस्या कर जैनेश्वरी दीक्षा लेकर और अन्य साढ़े पांच करोड़ मुनियों ने मोक्ष को प्राप्त किया है, यहां की भूमि का कण कण पावन है

यहां की भूमि सकारात्मकता और ऊर्जा से परीपूर्ण है,आप यहां आए हो तो हमे निज की परिणीति में जाना है और निज को पहचानना है और शाश्वत सुख को प्राप्त करना है और अपनी शक्ति को पहचानना है । यहां आकर सिद्धों के स्वरूप को पहचानो और सोचे की मेरे अंदर भी वो ही शक्ति है आगे कहा की यदि राग करना है तो धर्म का करो,धर्म के बिना आपका कोई साथी नही है,चिंता करना है तो शास्त्र की करो,व्यसन करना है तो दान का व्यसन करो,त्याग करना है तो इंद्रियों के विषय का त्याग करो।

 

 

  

मुनिश्री ने समाज की घटती जन संख्या पर भी चिंता जताई और कहा की इससे आपके तीर्थ,आयतन,मुनियों पर भविष्य में संकट उत्पन्न हो सकते है। 
इसके पूर्व अर्पित सागर जी महाराज ने निमाड़ी में बड़े विनोद पूर्ण तरीके से कहा की या निमाड़ की धरती छे न यहां का लोग बड़ा भाग्य शाली छे की तीन तीन सिद्ध क्षेत्र का पास छे और यो बावनगजा निमाड़ को प्रवेश द्वार छे ,और आप सभी भी इन सिद्ध क्षेत्र पर करोड़ों मुनियों ने साधना कर के मोक्ष को प्राप्त किया है आप भी सिद्धत्त्व को प्राप्त करे,ये तीर्थ हमारे जीवन को संवारने वाले है और इस अचेतन तीर्थ पर चेतन तीर्थ आए है तो यहां प्रभावना हो रही है मुनि श्री ने बताया की तीर्थ 3 प्रकार के होते है तीर्थ क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र जहा तीर्थंकर के गर्भ,जन्म, तप,ज्ञान,मोक्ष कल्याणक होते है वो तीर्थ क्षेत्र कहलाते है, जहा अतिशय ,चमत्कार होते है अतिशय क्षेत्र कहलाते है और और हम सौभाग्य शाली है की जहा से कई मुनि मोक्ष पधारे उस सिद्ध क्षेत्र के पास रहते है और निमाड़ की पावन धरा का कण कण पावन है जहा से कई मुनिराज मोक्ष पधारे, यहां के दर्शन मात्र से हमारे पापो की निर्जरा होती है और पुण्य का आश्रव होता है ।यह तीर्थ भगवान मुनिसुव्रत नाथ के काल का स्मरण करवाता है, ,मुनिश्री ने कहा की 100 नए तीर्थो के वंदना करने से जो पुण्य प्राप्त होता है वो एक प्राचीन तीर्थ की वंदना करने से प्राप्त होता है ,नए मंदिर बनाने से ज्यादा पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण से प्राप्त होता है ,मुनिश्री ने चारित्र चक्रवर्ती शांतिसागर जी का दृष्टांत देते हुए बताया की उन्होंने 1105 उपवास किए थे जो की उस समय की सरकार के जैन समाज के विरुद्ध निर्णय को लेकर किए थे और बताया की जहां हमारा चातुर्मास हुआ फलटन महाराष्ट्र में वहा आचार्य शांति सागर जी ने अपने जीवन काल के सर्वाधिक 3 चातुर्मास किए । 
आर्यिका गरिमा मति जी माताजी ने भी संक्षिप्त में संबोधित किया ।
प्रवचन के पूर्व मुनि संघ का प्रातः 7.30 बजे पाटी रोड़ से बावनगजा जी में मंगल प्रवेश हुआ जहा ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी, उपाध्यक्ष जितेंद्र गोधा, वरिष्ठ ट्रस्टी राजा भाई धामनोद ने मुनि द्वय के पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी और श्रीफल भेंट कर धूमधाम से आगवानी की पूरे निमाड़ के लोगो ने नारों और जयकारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया ,फिर बैंड बाजों और भक्ति नृत्य करते हुए श्रावक श्रविका मुनि द्वय को लेकर बड़े बाबा के दर्शनार्थ ले कर गए जहा मुनि संघ ने बड़े भगवान के दर्शन किए फिर वापस तलहटी में लौटे जहा धर्म सभा रखी गई थी मंगलाचरण संगीता पाटोदी सनावद ने किया ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी और ट्रस्ट कमेटी ने मुनि द्वय और आर्यिका माताजी को श्रीफल भेंट किया साथ ही भगवान आदिनाथ के चित्र का अनावरण किया गया दीप प्रज्वलन दोनो मुनिराजो के गृहस्थ जीवन के परिवार सदस्यो ने किया ,कार्यक्रम का संचालन प्रबंधक इंद्रजीत सिंह मंडलोई ने किया ,स्वागत भाषण ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी ने किया ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारी राजा भैया धामनोद, जितेंद्र गोधा, निलेश रांवका, विपुल गंगवाल,डॉक्टर चक्रेश पहाड़िया ट्रस्टी ,मनीष जैन मीडिया प्रभारी , किरण दोशी,मनीषा अंतिम जैन और स्टाफ सदस्यों ने ब्रह्मचारी नमन भैया ,महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवार सदस्य ,विहार में चल रहे श्रावक भाई ,बहन और संघपति भरत भाई जिरभार,विधान पुण्यार्जक भूपेंद्र भाई, भरत भाई आदि का तिलक,मोतियों की माला,पांच रंग के अंग वस्त्र पहना कर सम्मान किया गया ,संघपति भरत भाई ने भी ट्रस्ट अध्यक्ष और ट्रस्ट कमेटी का स्वागत किया महाराज जी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष विनोद दोशी को प्राप्त हुआ तो चारो मुनि आर्यिका के कर पात्र में शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य धीरेंद्र कुमार,वीरेंद्र कुमार,सुरेंद्र कुमार जैन परिवार सनावद को प्राप्त हुआ । संचालन पंडित मौसम शास्त्री ने किया ।दोनो महाराज ने संघपति भरत भाई को दान चिंतामणि की उपाधि से सम्मानित किया , उसके पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या और सामयिक हुई ,दोपहर को भक्तामर विधान का आयोजन किया गया जिसमे विद्या पूर्ण ग्रुप बड़वाह ,कमल जैन & पार्टी के संगीत से संयोजित किया गया इस विधान के सौधर्म इंद्र और पुण्यार्जक भरत भाई जिरभार रहे और आज के सारे अनुष्ठान के पुण्यार्जक भरत भाई रहे ,शाम को मुनिसंघ की आरती गुरु भक्ति और भगवान की आरती की गई ।इस पूरे कार्यक्रम में निमाड़ मालवा के सैकड़ों श्रावक श्रविका उपस्थित थे जिसमे इंदौर,सनावद, बड़वाह, महेश्वर,मंडलेश्वर,खरगोन, बैडिया,पिपलगोन,बलसामुद, साटकुट,काटकुट, बामंदी,धामनोद, अंजड,मनावर, बाकानेर,बड़वानी,के श्रावक उपस्थित थे ।
दीपक जैन प्रधान से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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