पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत तीसरा दिवस तप कल्याणक की क्रियाएं देख कर श्रद्धालुओ की आंखों से बही अविरल धारा तप से जीवन में सुगंधि ओर तप के बल से ही मनुष्य का जीवन शोभायमान – मुनि श्री विमल सागर

धर्म

पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत तीसरा दिवस तप कल्याणक की क्रियाएं देख कर श्रद्धालुओ की आंखों से बही अविरल धारा तप से जीवन में सुगंधि ओर तप के बल से ही मनुष्य का जीवन शोभायमान – मुनि श्री विमल सागर

निंबाहेड़ा।
नगर में चल रहे पंच कल्याणक महा महोत्सव के तीसरे दिवस दिगंबर समाज जनों ने भक्तिभाव से भगवान के तप कल्याणक कार्यक्रम को संपन्न किए। आदिनाथ मांगलिक भवन में सर्वश्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के शिष्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज के मार्ग दर्शन में मुनिश्री विमलसागर जी , मुनिश्री अनंतसागर जी , मुनिश्री धर्मसागर जी एवं मुनिश्री भावसागर जी के सानिध्य में एवं ब्रह्मचारी प्रदीप भैयाजी ‘सुयश’ अशोक नगर के निर्देशन में 14 फरवरी तक चलने वाले आनंद प्रदायक पंच कल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत 12 फरवरी सोमवार को प्रातः काल की बेला मे श्रद्धालु जनो ने मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र नित्यमह अभिषेक, शान्तिधारा, पूजन , जन्म कल्याणक पूजन एवं हवन, पूजन कर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का अर्घ्य समर्पित कियागया। दोपहर को आयोजित धर्मसभा में मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र, भक्तिपाठ, महाराजा नाभिराय का राजदरबार, युवराज आदिकुमार का विवाह, युवराज आदिकुमार का राज्याभिषेक, 32000 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, राज्य संचालन, षट्कर्म उपदेश 72 कलाओं को सिखाना, दण्ड व्यवस्था, दण्डनायक की स्थापना, ब्राह्मी सुन्दरी शिक्षा सांसारिक व्यवस्था, नीलांजना नृत्य की प्रस्तुति श्रुति सोनी एवम शीतल जैन द्वारा की गई, जिसे मुनि वृंदो द्वारा आशीर्वाद देकर सराहा गया। कार्यक्रम में लौकांतिक देवों का आगमन वैराग्य की अनुशंसा, भरत- बाहुबली को राज्य सौंपना सुदर्शन दीक्षा वन की और प्रस्थान, दीक्षा विधि, अंकन्यास, संस्कारोपण पूजनकर संगीतमय महाआरती, शास्त्र प्रवचन हुए। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विमल सागर जी ने कहा कि अच्छी-अच्छी द्रव्य से पूजन करना चाहिए, उत्तम द्रव्य चढ़ाने से स्वर्ग में स्वर्ण के महल मिलते हैं, महोत्सव में समाज के द्वारा द्रव्य लाना चाहिए ,इससे नगर में हर ओर से वृद्धि होती है, जो श्रद्धालु लोग महोत्सव में द्रव्य लाते हैं ,अनंत गुना फल मिलता है ।

 

 

 

पूजन में कंजूसी नहीं करें ,जो दिन में तीन बार भक्ति, पूजा ,आराधना करता है उच्च पदों को प्राप्त होता है । 

मुनि श्री अनंतसागर जी महाराज ने कहा कि नरको के भयानक दुख होते हैं ,धार्मिक कार्यों में मन स्थिर नहीं रह पाता है, लेकिन लौकिक कार्यों में मन अच्छा लगता है , तप के द्वारा ही व्यक्ति के जीवन में शोभा आती है, क्षमताओं के अनुसार तप करें।

 

समाज के प्रवक्ता मनोज सोनी ने बताया कि मंगलवार को ज्ञान कल्याणक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातः 6 बजे से मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र नित्यमह अभिषेक, शान्तिधारा ,पूजन , तपकल्याणक पूजन, शांतिहवन ,आचार्य श्री जी की पूजन के साथ प्रातः 8:45 बजे मुनि श्री के प्रवचन तथा 9:30 बजे नवदीक्षित महामुनिराज की आहारचर्या (पंचाश्चर्य) दोपहर को मंगलाष्टक, दिग्बंधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र, भक्तिपाठ, ज्ञान कल्याणक की

आंतरिक क्रियाएं, जाप अनुष्ठान , श्री जी की स्थापना, मंत्र आराधना , अधिवासन, तिलक दान,नेत्रोन्मीलन, सूरिमंत्र, प्राणप्रतिष्ठा मंत्र, सूर्यकला चंद्रकला, केवल ज्ञानोत्पत्ति, समवशरण रचना, मुनि श्री द्वारा दिव्य देशना, ज्ञानकल्याणक पूजन हवन आदि के साथ सांयकालीन बेला 6:30 बजे से संगीतमय विशेष महाआरती ,शास्त्र प्रवचन, 7:30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम सत्येंद्र शर्मा एंड पार्टी दिल्ली द्वारा संपन्न कराए जाएंगे।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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